कुटुंब न्यायलय + Kutumb Nyayalaya Kya Hai || Best Law 2022
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कुटुंब न्यायलय + Kutumb Nyayalaya Kya Hai || Best Law 2022
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Kutumb Nyayalaya – कुटुंब न्यायलय में पति व पत्नी के बीच उत्त्पन मतभेदों को दूर करने तथा आपसी तालमेल सही करके सुलह करवाती है। और कुटुंब न्यायलय पति – पत्नी से सम्बन्थित तनावपूर्ण झगड़ो पर आदेश पारित करने में सक्षम है। यह कुटुंब न्यायलय एक्ट – 1984 के अंतर्गत आता है। 

Kutumb Nyayalaya Kya Hai – पारिवारिक न्यायालय में पति-पत्नी के बीच उत्पन्न होने वाले मतभेदों को सुलझाया जाता है और आपसी समन्वय को सुधार कर सुलह किया जाता है। लेकिन अगर एक पति या पत्नी दूसरे को अपना अधिकार या सुख इस तरीके से नहीं देते हैं, तो इससे होने वाली कोई भी हानि दोनों पक्षों के लिए स्थायी होगी। फिर भी इन कठिनाइयों को एक समयावधि में हल करने में वर्षों लग जाते, यहाँ तक कि कई दिनों तक किए गए कुछ प्रयासों के बावजूद।

Kutumb Nyayalaya – हमें अपनी स्थिति को समझना चाहिए: हम किसी भी संघर्ष को नहीं पहचान सकते  हैं – फिर चाहे वह यौन हो या अन्यथा – हमारे मध्य  भगवान किससे इस प्रकार  के मामले पर विचार करता है?  फैमिली कोर्ट की एक खुली स्वतंत्र संरचना है जिसमें ज्यादातर अधिकांशतः  (कुछ अपवादों के साथ) सदस्यों के भी वंशज और साथ ही उन परिवारों के प्रतिनिधि सदस्य शामिल हैं जो बचपन से ही एक साथ बड़े हुए हैं। इसका मतलब है कि मौजूद सभी लोगों के लिए पर्याप्त जगह है

कुटुंब न्यायलय में किस तरह के मामलों की सुनवाई होती है।

Kutumb Nyayalaya – कुटुंब न्यायलय में पारिवारिक सम्बन्धी मामले ही सुनवाई योग्य है। इन पारिवारिक विवाद से सम्बंधित मामलोँ में निम्नलिखित मामले सुनवाई योग्य है। 

  • पति व पत्नी के तलाक से सम्बंधित मामले 
  • कुटुंब न्यायलय में जुडिशियल सप्रेशन से सम्बंधित मामले 
  • पति – पत्नी के दांपत्य जीवन की दोबारा स्थापना से सम्बंधित मामले 
  • कुटुंब न्यायालय में भरण – पोषण के मामले सुनवाई 
  • दाम्पत्य जीवन से उत्पन्न सन्तानो की कस्टडी के लिए 
  • पति – पत्नी की संपत्ति को लेकर उत्पन्न विवादित मामले 

Kutumb Nyayalaya – पारिवारिक न्यायालय में पति-पत्नी के बीच उत्पन्न होने वाले मतभेदों को सुलझाया जाता है और आपसी समन्वय को सुधार कर सुलह किया जाता है। यदि वे विवाह अनुबंध में अपने अंतर को हल नहीं कर सकते हैं, तो यह आपके लिए मध्यस्थता के माध्यम से निर्धारित किया जाना चाहिए।” इसी तरह की व्यवस्था तब भी हो सकती है जब पदार्थ की समस्या हो जब एक पति या पत्नी दूसरे के साथ घरेलू हिंसा में शामिल हो या जहां दोनों पति-पत्नी ने अपराध किया हो

Kutumb Nyayalaya – उस अवधि के भीतर अवैध कार्य जिसमें किसी अज्ञात तीसरे पक्ष से बार-बार संपर्क शामिल है, जिसके दौरान कोई वैध तलाक संधि संभवतः मौजूद नहीं हो सकती है! इन मुद्दों को हल करने का एकमात्र तरीका (यदि संभव हो) पूर्ण अलगाव शामिल होगा, जब तक कि कम से कम आधा पार्टियों ने अनुमति नहीं लेने के कारण उनकी अनुपस्थिति को स्वीकार करते हुए कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे? दबाव के तहत किए गए ऐसे अनौपचारिक समझौते पहले भी काफी नियमित रूप से उपयोग किए जाते थे

कुटुंब न्यायलय में वकीलों की क्या भूमिका होती है।

Kutumb Nyayalaya – कुटुंब न्यायलय को हिंदी में परिवार न्यायलय भी कहा जाता है। और परिवार न्यायलय में विवादित मामलो की पैरवी करने के लिए एक अधिकार के रूप में ऐडवोकेट को पेश नहीं किया जा सकता है। जैसा की अधिकांश एक आपराधिक मामलो में एडवोकेट को बहस के लिए चुनना अभियुक्त का अधिकार होता है। और इसके साथ ही पीड़ित पक्ष के लिए अभियोजन ऑफिसर द्वारा रखा जाता है।  


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Kutumb Nyayalaya – यह बात भी पूर्ण रूप से सत्य है। की दीवानी मामलों में भी अधिकार पूर्वक वकील को नियुक्त किया जाता है। BUT कुटुंब न्यायलय में आप एक वकील को अधिकार पूर्वक अपनी समस्या के लिए पेश नहीं कर सकते है। न्यायलय यह भी देखता है आप अपनी बात सही प्रकार से नहीं कह पा रहे तो न्यायलय वकील को सलेक्ट करता है। और न्यायलय से अधिवक्ता के जरिए काम करवाने की अनुमति मिल जाती है। 

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इण्डियन एविडेन्स एक्ट की प्रक्रिया का कम लगना

Kutumb Nyayalaya – कुटुंब न्यायलय की कार्यवाही में Indian Evidence Act की पूर्ण प्रक्रिया लागू नहीं होती है। वास्तव में इसका प्रमुख उद्देश्य पति – पत्नी के मध्य विचारोँ के आपसी तालमेल न होने से उत्पन्न लड़ाई – झगड़ो को न्यायधीशों को अपनी तर्क बुद्धि से सुलझाना है। और आपसी समझोतो की दिशा में कदम बढ़ाना है। और यह भी सत्य है। की जब दाम्पत्य जीवन में किसी प्रकार की सुलह नहीं होती है तो यह मामला फैमली कोर्ट में प्रेषित कर दिया जाता है। जहाँ कोर्ट द्वारा सभी एविडेन्स की गहनता से अध्यन के बाद निर्णय सुनाती है।