मन्दिर के फूल से कैसे बनाये प्रोडक्ट | Best New Ideas 2022
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मन्दिर के फूल से कैसे बनाये प्रोडक्ट | Best New Ideas 2022
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 Surat News , मन्दिर के फूल भगवान को चढ़ाए जाने के बाद शाम को निकालकर अलग रख दिए जाते है। जो की एक वेस्ट मैटरियल होता है। ऐसे में सूरत शहर की रहने वाली मैत्री जरीवाला के दिमाग में Business Idea आया और उन्होंने इसके प्रोडक्ट बनाने शुरू कर दिए जिसे लोगो ने खूब पसन्द किया | 

सूरत City की रहने वाली मैत्री जरीवाला पेशे से एक केमिकल इंजीनियर हैं। और रोज सुबह Morning Time में वे अलग-अलग मंदिरों में जाती हैं। और वह पूजा-पाठ करने के लिए नहीं, बल्कि वहां कूड़े के ढेर में पड़े फूलों ( Flower ) को कलेक्ट करने के लिए। भारतीय मन्दिरो की बात करें तो छोटे मन्दिरो में भगवान पर चढ़े फूलों को कूड़े पर ज्यादातर फेक दिया जाता है। 

मैत्री जी पिछले 1 साल से वो यह काम कर रही हैं। और अब आपके मन में सवाल ( Questions ) होगा कि आखिर इन फूलों ( Flower ) का वे क्या करती हैं? तो अब यह जवाब भी जान लीजिए। दरअसल मैत्री इन बेकार मन्दिर के फूल को अपसाइकिल करके साबुन, व अगरबत्ती, व मोमबत्ती, व ठंडई, व स्प्रे, व वर्मीकंपोस्ट सहित 10 से अधिक  वैराइटी के प्रोडक्ट बनाती हैं। और वो अभी अपने घर पर ही कर रही है। और  इससे हर माह  उन्हें 1.5 लाख रुपए तक की कमाई हो रही है। और साथ ही 9 लोगों को उन्होंने नौकरी ( Survice ) भी दी है।

हम आज की पॉजिटिव खबर ( News ) में जानते हैं कि मैत्री मन्दिर के फूल के इस काम ( Work ) की शुरुआत कैसे की। और इसके लिए उन्हें किन चीजों की जरूरत पड़ी और अब वह कैसे अपने काम ( Work ) को आगे बढ़ा रही हैं? और अगर आप मैत्री की तरह इस तरह इसका  काम करना चाहें तो वह कैसे कर सकते हैं


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कॉलेज Time  से ही वेस्ट मैनेजमेंट पर काम कर रही थीं

Surat News – 99 kanoon की टीम  से बात करते हुए 22 साल की मैत्री कहती हैं कि कॉलेज के समय  पहले साल से ही मैं वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट ( Project ) पर काम कर रही थी। और करीब 3 वर्ष  तक मन्दिर के फूल पर अलग-अलग तरह के वेस्ट (कूड़ा) को लेकर ( Work ) काम किया। और कई तरह के प्रोडक्ट तैयार किए और अब उनके हर पहलू की एनालिसिस या जाँच की। और इससे मुझे हर प्रकार के वेस्ट प्रोडक्ट की अच्छी खासी जानकारी हो गई।

मन्दिर के फूल ( images 1)
दैनिक भास्कर द्वारा साझा जानकारी ( making prodect images )

और इसके बाद मैत्री ने  रियलाइज किया कि बाकी वेस्ट की तुलना में फ्लावर वेस्ट यानि मन्दिर के फूल को अपसाइकिल करना और उससे नए प्रोडक्ट बनाना ज्यादा अच्छा  है। और क्योंकि इसे अपसाइकिल करने में लागत बहुत कम आती है और इसकी प्रोसेस भी काफी आसान होती है। और हमने इससे कुछ कार्ड और कुछ पेपर भी तैयार किए थे।

मैत्री ने अपने आखिरी सेमेस्टर में फ्लॉवर वेस्ट मन्दिर के फूल से कुछ प्रोडक्ट तैयार किए। और इसके लिए आवयशक  मशीनरी सपोर्ट उन्हें कॉलेज ( College ) की तरफ से मिला। और इसके बाद उन्होंने अपने आसपास के लोगों व Friends  से फीडबैक लिया। और हर जगह से मैत्री को पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला। और कई लोगों ने उन्हें इस अच्छे काम को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया।

मात्र 77 हजार रुपए की लागत से शुरू किया बिजनेस स्टार्टअप

मैत्री बताती  हैं कि मन्दिर के फूल  वेस्ट हमारे आसपास आसानी से मिल जाते हैं। और आप किसी भी मंदिर ( Temple ) में जाइए या किसी नदी के किनारे जाइए, आपको बहुत बड़ी संख्या में बेकार फूल ( Flower ) मिल जाएंगे यानी रॉ मटेरियल की कमी नहीं है।

और इसलिए वर्ष  2021 में पढ़ाई कंप्लीट  करने के बाद मैंने इसे स्टार्टअप के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला लिया। हालांकि तब परिवार वालों  ने थोड़ी नाराजगी दिखाई। वह  चाहते थे कि इंजीनियर बेटी इस मंदिर ( Temple ) से उस मंदिर तक भटकने की बजाय किसी बड़ी कंपनी ( Compeny ) में काम करे, और अच्छी नौकरी करे, लेकिन बाद में परिवार के  लोग भी सपोर्ट करने लगे।

मैत्री  बताती हैं कि पिछले वर्ष  होली के मौके पर मैंने प्रोफेशनल लेवल पर काम ( Work ) करना शुरू किया। और चूंकि होली का मौका था, लिहाजा मैने अपना पहला प्रोडक्ट रंग और गुलाल तैयार किया। और इसके लिए सबसे पहले मन्दिर के फूल जो  वेस्ट कलेक्ट किया। 


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और उन्हें घर लाकर सेग्रिगेट किया और फिर ( Dry ) सुखाया। और इसके बाद ग्राइंड करके पाउडर अर्थात पीस कर तैयार किया। और इससे अलग-अलग रंग के फूलों ( Flower ) के वेस्ट से अलग-अलग रंग और गुलाल तैयार हुए। और शुरुआत में हमें कॉलेज की तरफ से हमें 77 हजार रुपए का फंड मिला था। इसी फंड से अपना बिजनेस स्टार्टअप शुरू किया।

Social Media से देशभर में कर रही हैं मार्केटिंग

Surat News – मैत्री बताती हैं कि होली ( Holi ) के मौके पर हमारा गुलाल और रंग खूब बिका। और सूरत और आसपास के शहरों में हमारा सामान  पहुंच गया। और इससे मनोबल बढ़ा और हमने अपना काम करने का दायरा बढ़ाना शुरू किया। और रंग-गुलाल के बाद साबुन, व अगरबत्ती, व मोमबत्ती, व स्प्रे, व वर्मीकंपोस्ट जैसे प्रोडक्ट बनाना शुरू किया। और धीरे-धीरे हमारे साथ कुछ और  NGO भी जुड़ते गए। व साथ ही माउथ पब्लिसिटी अर्थात लोगो के जाकर बताना ,के जरिए एक के बाद एक कई ग्राहक हमसे जुड़ते गए।

मन्दिर के फूल ( images 2 )

नवंबर साल 2021 में मैत्री ने मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया ( Social Media ) का इस्तेमाल करना शुरू किया। और इंस्टाग्राम और फेसबुक ( Facebook ) पर अपने प्रोडक्ट की फोटो-वीडियो अपलोड करने लगीं। और धीरे-धीरे उनके फॉलोअर्स ( Follower ) बढ़ते गए। और फिर प्रमोट करना शुरू किया। और इसका फायदा यह हुआ कि सूरत शहर के बाहर भी मन्दिर के फूल वाले उनके प्रोडक्ट की डिमांड आने लगी। और मध्य प्रदेश, व राजस्थान, व दिल्ली सहित कई राज्यों के लोग उनके कस्टमर बन गए। और अभी हर दिन उन्हें 20-25  ऑर्डर मिलते हैं।

वह कैसे तैयार करती हैं प्रोडक्ट

surat News – मैत्री कहती  हैं कि मेरे साथ 9 लोगों की Teem  है। और इसमें ज्यादातर महिलाएं शामिल हैं। जो फ्लॉवर ( Flower ) वेस्ट से बेस्ट प्रोडक्ट बनाने का काम करती हैं। और जहां तक रॉ मटेरियल की बात है। और इसके लिए हमारे साथ कई NGO जुड़े हैं। हमने कई मंदिरों से  टाइअप किया  है। और नगर निगम भी हमें सपोर्ट करते हैं। वह इसलिए की  फ्लॉवर वेस्ट की कमी नहीं होती है।

मन्दिर के फूल जो वेस्ट कलेक्ट करने के बाद हम सबसे पहले फूलों की पत्तियों को सुखाते हैं। और इसके बाद ग्राइंडर की Help से उनका पाउडर तैयार करते हैं। और इसके बाद उस पाउडर ( Powder ) से अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट बनाते हैं। हम कई बार ग्राइंड करने की बजाय हम फूलों के वेस्ट को उबाल ( Bowl ) लेते हैं। तथा फिर उसे छानकर स्प्रे, व ठंडई जैसे प्रोडक्ट बनाते हैं। और इसके बाद उसकी लेबलिंग और Paking  होती है।

आप कहां ले सकते हैं ट्रेनिंग 

मैत्री ने फ्लॉवर ( Flower ) वेस्ट मैनेजमेंट की कहीं स्पेशल ट्रेनिंग नहीं ली है। बस उन्होंने चार वर्ष  तक इसी प्रोजेक्ट पर काम किया है। व कई रिसर्च किए हैं। लिहाजा उन्हें खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं पड़ी। और अगर आप इस प्रकार का काम करना चाहते हैं मन्दिर के फूल का तो ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी। और इसके लिए आप सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट (CIMAP) लखनऊ से आप ट्रेनिंग ले सकते हैं। यह  2 या 5 दिनों का कोर्स होता है।

Surat News – यह कोर्स करीब 4 हजार रुपए फीस होती है। और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वेस्ट मैनेजमेंट भोपाल से भी आप ट्रेनिंग ले सकते हैं। साथ ही Social Media  और Youtube  पर इससे रिलेटेड ढेरों वीडियो हैं। आप उनकी Help  से भी आप यह काम सीख सकते हैं।