संपत्ति पर कब्जा होने पर क्या करें | Best कानूनी ज्ञान 2022
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संपत्ति पर कब्जा होने पर क्या करें | Best कानूनी ज्ञान 2022
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संपत्ति पर कब्ज़ा – संपत्ति पर कब्जा अवैध होने पर हमें क्या करना चाहिए। भारतीय कानून में क्या सवैधानिक उपाय का प्रयोग कर अपनी संपत्ति को हासिल कर सकते है। जानें संपत्ति का अधिकार 

संपत्ति पर कब्जा –  जिस सम्पति के मालिक आप स्वय है। उस सम्पति पर आप ही का अधिकार होना चाहिए यह आपका कानूनी अधिकार है। किसी भी प्रकार से सम्पति के मालिक को यह अधिकार मिलता है की उसकी सम्पति पर कब्ज़ा उसका हो , और उसकी आज्ञा या इच्छा के बिना सम्पति पर कब्ज़ा नहीं होना चाहिए। 

संपत्ति पर कब्जा –  ( Current Time ) वर्तमान समय में हर घण्टे यह News सुनने को मिल जाती है की अमुख ने उस सम्पति पर कब्ज़ा कर लिया है। इस प्रकार के अवैध कब्जों से अपराधों की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोतरी हुई है। प्रोफेशनल अपराधी अपने धारदार हथियार , रिवॉल्वर , आदि दिखाकर जो किसी भी सरल व प्रतिष्ठावान सभ्य व्यक्ति को उसके मकान जमीन पर अवैध कब्जा कर लेते है। और उन्हें सम्पति से बेदखल होना पड़ता है। 

संपत्ति पर कब्जा – कुछ मामले इस प्रकार भी अक्सर सुने जाते है। की अमुख किसी किराएदार को , या फिर किसी पट्टेदार को , या फिर अन्य किसी कारण या हैसियत से संपत्ति पर कब्ज़ा रखते है और संपत्ति मालिक बेदखल कर दिया जाता है। 


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संपत्ति पर कब्जा –  Indian Kanoon में इस प्रकार के विवादों के हल करने के लिए सम्पूर्ण व्यवस्था प्रदान की गई है। हमारे जीवन में बहुत सी परिस्थितयों का सामना करना पड़ता है। और इन घटनाओं में पीड़ित पक्ष के पास अपराधिक व सिविल आप दोनों ही प्रकार से Kanoon का सहारा प्राप्त कर सकते है। आज हम इस आर्टिकल में यह जानेंगे की ऐसी दशाओं में कानूनी उपाय क्या है। 

1 – Criminal Law – आपराधिक कानून के प्रयोग द्वारा

( क ) Section – 420 IPC – इंडियन पीनल कोड की धारा – 420 एक प्रसिद्ध धारा है। इस धारा का प्रयोग लगभग सभी प्रकार के धोखाधड़ी व बेईमानी के मामलो में प्रयोग की जाती है। इसलिय जब भी किसी पीड़ित व्यक्ति को उसकी संपत्ति पर कब्ज़ा से बाहर निकाल दिया गया हो , आप पुलिस स्टेशन पर जाकर इस धारा में रिपोर्ट दर्ज करवाए। ( संपत्ति पर कब्जा )

( ख ) Section – 406 IPC – आप इंडियन पीनल कोड की धारा – 406 का प्रयोग कर सकते है। यह धारा अमानत में खयानत स्पस्ट शब्दों में शान्ति भंग करने के उद्द्शेय से तथा किसी पीड़ित व्यक्ति को विश्वास्पात्रता में लेकर घर में घुसकर संपत्ति पर कब्ज़ा करना अपराध की श्रेणी में आता है। वह व्यक्ति जो इस प्रकार के अपराध से पीड़ित हो , वह इस धारा के तहत कम्प्लेन पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाए। ( संपत्ति पर कब्जा )

( ग ) Section – 467 IPC – आप इंडियन पीनल कोड की धारा – 467 का प्रयोग कर सकते है। इस धारा का प्रयोग किसी भी प्रकार की संपत्ति के जाली – फर्जी दस्तावेज तैयार कर उस संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया जाता है। इसलिय पीड़ित पक्ष को पुलिस थाने में इस धारा के तहत कम्प्लेन दर्ज करवानी चाहिए। ( संपत्ति पर कब्जा )

Civil Law – सिविल कानून का प्रयोग करना

संपत्ति पर कब्ज़ा – सिविल केस का नाम सुनते ही बहुत लम्बी प्रक्रिया याद आने लगती है। और व्यक्ति को थकान होने लगती है। और वह इस प्रक्रिया से बचना चाहता है। लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत देश की दीवानी केस की न्याय प्रणाली लम्बी व खर्चीली होती है। पर इसका मतलब यह नहीं है की सभी मामलो में ऐसा ही होता है भारतीय कानून में इस समस्या का हल भी छुपा हुआ है। इसको विस्तार से समझते है। 

Specific Relief Act in Hindi – स्पेसिफिक रिलीफ एक्ट – 1963

संपत्ति पर कब्ज़ा  – जल्दी न्याय मिलने के लिए इस प्रकार की प्रॉब्लम के सॉलूशन को दूर करने के लिए संसद द्वारा पारित यह अधिनियम एक वरदान की तरह होता है। स्पेसिफिक रिलीफ अधिनियम की धारा – 6 इस प्रॉब्लम को दूर करने में सहायता प्रदान करती है। 


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धारा – 6 के अनुसार किसी क्षेत्र में व्यक्ति को उसकी संपत्ति से बेदखल कर दिया जाता है। और इस प्रकार का बेकब्जा किसी भी वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से नहीं किया गया है। और अपनी प्रबल इच्छा से उसकी संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया जाता है। इस दशा में आप इस कानून के तहत इसका प्रयोग कर सकते है।
संपत्ति पर कब्जा ( images 1 )

 

Specific Relief Act के Section – 6 बेनिफिट क्या है।

  • धारा – 6 के अन्तर्गत केस फाइल करने का फायदा यह मिलता है। की किसी भी संपत्ति से कब्ज़ा मुक्त किए जाने पर ( 6 Month , महीना ) की समय सीमा में लगाया जाएगा और इस प्रकार के केस में समय सीमा निकल जाने के बाद कोर्ट इस केस पर सुनवाई नहीं करेगा। और यह केस एक सिविल केस प्रक्रिया के अकॉर्डिंग चलेगा व इसमें कानूनी प्रक्रिया लम्बी होती है। ( संपत्ति पर कब्ज़ा ) 
  • इस धारा का प्रमुख विषय यह है। की आप इस Section के अन्तर्गत Government के विरुद्ध केस फाइल नहीं किया जा सकता है। और ऐसा दावा सिविल प्रक्रिया में ही लागू होगा न की स्पेसिफिक रिलीफ Act में लाया जायगा। धारा –  6 में केस  करने का मतलब यह सुविधा आमजन नागरिकों के लिए है। जिसमे वह राहत प्राप्त कर सकें। ( अचल संपत्ति पर कब्ज़ा ) – और यह व्यवस्था पीड़ित को शीघ्र न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से प्रयोग की जाती है।
  •  इस धारा की प्रमुखता यह है। की इस धारा के अनुसार न्यायलय द्वारा कोई आदेश / डिक्री पारित कर दी जाती है। इस प्रकार के डिक्री / आदेशों के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती , कोई रिवीजन प्रस्तुत नहीं किया जाता है। ( अचल संपत्ति पर कब्ज़ा ) – इस धारा के प्रावधान को लागू करने से कानूनी प्रक्रिया बड़ी नहीं होती है। और पक्षकारों को जल्दी न्याय मिलता है। 
  • अचल संपत्ति पर कब्ज़ा – इस Section – 6 में कोई भी व्यक्ति कोर्ट केस ला सकता है। चाहें वह संपत्ति मालिक हो , या संपत्ति किराएदार हो , या संपत्ति पट्टेदार हो , किसी को भी संपत्ति से बेदखल / निकालना एक कानूनी प्रक्रिया है। और उसी के अनुसार उसे निकाला जा सकता है। 

 Sampati par Kabja –  यह देखा जाता है। की जो सभ्य व ईमानदार व्यक्ति होते है। व किसी भी अपराध में संलग्न नहीं होते है। इस प्रकार के नागरिकों की भूमि या घर या अन्य  संपत्ति पर प्रतिकूल कब्ज़ा  कर लिया जाता है। इस धारा का निर्माण ही ऐसे मामलों के लिए किया गया है।

ऐसे में आपको यह ध्यान रखने वाली बात है। की आपने कोई संपत्ति सही दस्तावेज के आधार पर ली है। और उस संपत्ति पर नगर के बदमाशों का कब्ज़ा है तो आप इस धारा में वाद ला सकते है।

संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा – इन सब कार्यों के अलावा एक संपत्ति के मालिक को अपनी संपत्ति के प्रति सजग रहना चाहिए और अपनी संपत्ति को बेकब्जा नहीं छोड़ना चाहिए।  वास्तव में संपत्ति पर कब्ज़ा भू – स्वामी द्वारा लापरवाही के कारण होता है। जिससे न्यायलय की ओर जाना पड़ता है अतः भू मालिक को लापरवाही के कार्यो से बचना चाहिए ताकि न्यायलय में जाने से बचा जा सके |