5 kanooni Tips,पैतृक संपत्ति मामलें के, Best Legal News 2022
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5 kanooni Tips,पैतृक संपत्ति मामलें के, Best Legal News 2022
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पैतृक संपत्ति क्या होती है। पैतृक संपत्ति मामलों में हम 5 कानूनी तरीके बता रहे है। जिन्हे समझने के बाद आपको किसी भी प्रकार से कोर्ट कचहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। दादा की संपत्ति ( Property ) में पोता या पोती का कितना अधिकार होता है, और इसको लेकर सभी जानकारियां आपको जाननी जरूरी है, 

 हमारे भारत में पैतृक संपत्ति यानी की पूर्वजों की संपत्ति (Ancestral property) को बांटना काफी मुश्किल  प्रक्रिया है. और शायद यही वजह है कि देश के न्यायलयों (court) में अधिकांश  मामले पैतृक संपत्ति यानी की पिता या फिर दादा की संपत्ति से जुड़े हुए होते हैं. और जिन्हें निपटाना कितना मुश्किल होता है, और यह बात सभी जानते हैं. 

क्योंकि आपके सालों साल इन मामलों को लेकर मुकदमें ( Case ) चलते ही रहते हैं और जिनका  हल दूर-दूर तक नहीं हो पाता. और जिसकी वजह से समय की बर्बादी के साथ ही दोनों पक्षकारों  में हालात समय ( Time ) के साथ बिगड़ते चले जाते हैं. और वैसे तो बच्चे के जन्म ( Birth ) के साथ ही वो अपने पिता ( Father ) की संपत्ति का अधिकारी (property right) बन ही जाता है. BUT  अगर बात दादा की संपत्ति की हो, तो फिर इसमें पोता या पोती का कितना अधिकार ( Rights ) होता है, यह जानना सबके लिए बहुत  जरूरी है.

पैतृक संपत्ति क्या होती है।

अपने पिता, या दादा या परदादा अर्थात दादा के पिता से विरासत में मिली संपत्ति पैतृक संपत्ति कहलाती है. और आप सरल शब्दों में समझे तो पुरुषों को लगभग पिछली चार पीढ़ियों तक की संपत्ति ( Property ) अगर विरासत में मिली है, तो वह पैतृक संपत्ति कहलाती हैं. 

और वहीं पैतृक संपत्ति पर किसी भी व्यक्ति का अधिकार ( Rights ) जन्म के बाद से ही हो जाता है. BUT  क्या आप जानते है संपत्तियों ( Propertys ) को दो हिस्सों में बांटा जाता है. और जिसमें पहली पैतृक संपत्ति होती है और दूसरा स्वॅम  कमाई गई संपत्ति. BUT  उससे पहले जानते हैं दादा ( Grandfather ) की संपत्ति में पोता या पोती का कितना अधिकार होता है.

संपत्ति में किसका कितना अधिकार 

पैतृक संपत्ति में पर प्लॉट के हिसाब से ही अधिकार ( Rights ) निर्धारित किया जाता है, और यानी की किसी भी व्यक्ति के हिसाब से अधिकार नहीं दिया जाता. और वहीं जन्म के बाद ही यह तय हो जाता है. BUT  अगर बात पीढ़ी की हो, तो आपको यह सब पहले ही निर्धारित हो जाता है.


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उदाहरण के लिए –  मान लीजिए एक पीढ़ी में संपत्ति ( Property ) के 5 हिस्से हुए हैं. और अब अगली पीढ़ी में उन 5 हिस्सों के भी हिस्से होंगे. और यानी के उस हिस्से का और विभाजन किया जाएगा. और बता दें, यह आप वही हिस्से हैं जो आप पिछली पीढ़ी को भी विरासत में मिले थे. और अब हिस्से होने के बाद अगली पीढ़ी को भी विरासत ( Virasat ) के रूप में ही मिला है.

बेटी को विरासत का अधिकार शादी होने पर भी 

साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन के बाद बेटी ( Daughter ) की वैवाहिक स्थिति उसके पिता की पैतृक संपत्ति के वारिस के अधिकार ( Rights ) को प्रभावित नहीं कर सकती है। और संशोधन के अनुसार, और एक बेटी को पैतृक संपत्ति ( Property ) में एक सहदायिक के रूप में मान्यता दी जाती है, और यानी पैतृक Property  में उसका जन्म से अधिकार होता है और इस प्रकार एक बेटी ( Daughter ) का पैतृक संपत्ति में उतना ही हिस्सा होगा जितना कि शादी ( Marriage ) के बाद भी एक बेटे का होता है। 

पैतृक संपत्ति ( images )

पैतृक संपत्ति व विरासत में मिली संपत्ति में क्या अंतर है

आप विरासत में मिली संपत्ति ( Property ) कोई भी संपत्ति है और जिसे आप मालिक ( Owner ) की मृत्यु के बाद वसीयत ( Vasiyat ) के माध्यम से प्राप्त करते हैं या उपहार ( Gift ) के रूप में प्राप्त करते हैं। पैतृक  वह  संपत्ति जन्म से ही विरासत ( Virasat ) में मिलती है। और परिवार के किसी सदस्य ( Mambers ) से विरासत में मिली संपत्ति प्राप्त हो सकती है।

और हालाँकि, आपको जानकारी होनी  चाहिए कि जो संपत्ति ( Property ) आपको अपनी माँ, या दादी, या चाचा, या भाई या परिवार के अन्य सदस्यों से विरासत ( Virasat ) में मिली है, और वह पैतृक संपत्ति बनने के योग्य नहीं है। और आपके पिता, या दादा, या परदादा और परदादा से पारित संपत्ति ( Property ) केवल पैतृक संपत्ति के रूप में योग्य है। और साथ ही, कोई भी संपत्ति ( Property ) जो बेटे को पिता या दादा से उपहार ( Gift ) के रूप में मिलती है,  पैतृक  वह संपत्ति (Ancestral property) के रूप में योग्य नहीं होगी।

एक दामाद का अपने ससुर की संपत्ति पर कितना अधिकार

इस प्रश्नः का  उत्तर सरल है। और कोई भी दामाद किसी भी सिचुएशन  में अपने ससुर की संपत्ति ( Property ) पर अधिकार का दावा नहीं कर सकता। वह ससुर को संपत्ति ( Property ) के निर्माण के लिए पैसे दे सकता था या फिर उनकी देखभाल ( Care ) कर सकता था। और फिर भी, किसी भी प्रकार से दामाद का कोई दावा नहीं हो सकता वह क्योंकि वह परिवार का हिस्सा नहीं है।


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 दिल्ली हाई कोर्ट ( High Court ) ने भी प्रापर्टी के एक मामले में फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि पिता की पूरी संपत्ति ( Property ) बेटे को नहीं मिल सकती है। वह क्योंकि अभी मां ज़िदा है और पिता की संपत्ति ( Property में बहन का भी अधिकार है.

जाने क्या है पूरा मामला 

  पैतृक संपत्ति – दिल्ली ( Delhi ) में रहने वाले एक शख़्स की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति का बंटवारा हुआ.और क़ानूनी ( Kanooni ) तौर पर उनकी संपत्ति का आधा हिस्सा उनकी पत्नी को मिलना था व आधा हिस्सा उनके बच्चों ( Children ) एक लड़का और एक लड़की  को.व लेकिन जब बेटी ने संपत्ति ( Property ) में अपना हिस्सा मांगा, तो बेटे ने उन्हें देने से इनकार  कर दिया.

और इसके बाद उन्होंने अदालत ( Adalat ) का दरवाज़ा खटखटाया. और मां ( Mother ) ने भी बेटी का समर्थन किया. और इस पर बेटे ने विरोध किया और कहा कि पूरी प्रॉपर्टी ( All Property ) उसे ही मिलनी चाहिए.और इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ( High Court ) ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के अनुसार  फ़ैसला सुनाया.और कोर्ट ने कहा की – BUT  अभी मृतक की पत्नी ज़िंदा हैं और तो उनका और मृतक की बेटी का भी संपत्ति ( Property ) में समान रूप से हक़ बनता है.

और साथ ही कोर्ट ( Court ) ने बेटे पर एक लाख रुपए का हर्जाना भी लगाया वह क्योंकि इस केस ( Case ) की वजह से मां को आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव उठाना पड़ा. और व कोर्ट ( Adalat ) ने कहा कि बेटे का दावा ही ग़लत है.और कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि आज के समय ( Time ) में ऐसा होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

पैतृक संपत्ति ( images 2 )

पैतृक संपत्ति में किसका- कितना हिस्सा होता है

प्रॉपर्टी क़ानून की जानकार डॉक्टर सौम्या सक्सेना बताती हैं कि किसी भी व्यक्ति की पैतृक ( Property ) संपत्ति में उनके सभी बच्चों और पत्नी ( Wife ) का बराबर का अधिकार होता है. और अगर किसी परिवार ( Family ) में एक शख़्स के तीन बच्चे हैं, और  पैतृक संपत्ति का बंटवारा पहले तीनों बच्चों में होगा. और फिर तीसरी पीढ़ी के बच्चे अपने पिता ( Father ) के हिस्से में अपना हक़ ले सकेंगे.

यह तीनों बच्चों को पैतृक ( Property ) संपत्ति का एक-एक तिहाई मिलेगा और उनके बच्चों और पत्नी ( Wife ) को बराबर-बराबर हिस्सा मिलेगा. हालांकि यह मुस्लिम समुदाय में ऐसा नहीं है. और इस समुदाय में पैतृक ( Property ) संपत्ति का उत्तराधिकार तब तक दूसरे को नहीं मिलता है। और जब तक अंतिम पीढ़ी का व्यक्ति जीवित हो.