कलकत्ता High Court “Wrong Legal Advice” देने पर वकील पर आपराधिक मुक़दमा नहीं हो सकता | Best Law 2022
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कलकत्ता High Court “Wrong Legal Advice” देने पर वकील पर आपराधिक मुक़दमा नहीं हो सकता | Best Law 2022
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Wrong Legal Advice – कलकत्ता हाई कोर्ट ने हाल ही में एक वकील पर अनुचित कानूनी सलाह देने पर कोई आपरधिक केस नहीं चलाया जा सकता है कोर्ट ने याची द्वारा की गई कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया है।

Wrong Legal Advice – कलकत्ता high court ने हाल ही में एक कंपनी को Bank ऋण की मंजूरी के संबंध में झूठी व  अनुचित कानूनी सलाह प्रदान करने के लिए एक Advocate के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को हाल ही में ख़ारिज कर दिया था, और जिसे बाद में 2.57 करोड़ रुपये के लिए गैर-निष्पादित Property (NPA) घोषित किया गया था।

जस्टिस आनंद कुमार मुखर्जी ने क्या कहा

कि याची वकील के खिलाफ आपराधिक कानूनी कार्यवाही केवल इसलिए शुरू नहीं की जा सकती क्योंकि Lawyer की राय स्वीकार्य नहीं थी, और विशेष रूप से किसी भी ठोस साक्ष्य के अभाव में कि यह मान लेना वह अन्य साजिशकर्ताओं से जुड़ा था।


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Wrong Legal Advice – अदालत ने कहा कि स्वीकार्य साक्ष्यों से साबित होने पर उसे घोर लापरवाही या फिर पेशेवर कदाचार के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, BUT अन्य साजिशकर्ताओं के साथ IPC की धारा – 420 व धारा – 109 के तहत उस पर तब तक आरोप नहीं लगाया जा सकता है। जब तक कि वह दोनों के बीच उचित व स्वीकार्य लिंक न हो।

Wrong Legal Advice Case – इस विवाद मामले में वकील पर IPC की धारा – 420, व 468, व 471 तथा 120बी के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। और उसके बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो ( CBI ) व  प्रवर्तन अपराध शाखा, व कोलकाता द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को ख़ारिज करने के लिए संबंधित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष याचिका दाखिल की गयी थी।

अनुचित Legal Advice – अदालत ने कहा कि प्राथमिकी ( FIR ) में याचिकाकर्ता का नाम नहीं था तथा अगर कंप्लेन को उसके अंकित मूल्य पर लिया जाता है व उसकी संपूर्णता में स्वीकार किया जाता है, और उसके खिलाफ यह मामला बनाने के लिए याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई क्राइम नहीं बनता है।


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Wrong Legal Advice – यह भी देखा गया कि चार्जशीट में इस प्रकार का कोई आरोप या सामग्री नहीं है जो हमें यह दिखाता  हो कि याचिकाकर्ता ने सह-आरोपी व्यक्तियों से मिलकर कोई गलत प्रॉफिट कमाया या कंपनी के पक्ष में कोई एक झूठी खोज रिपोर्ट तैयार करने के लिए कोई वित्तीय प्रॉफिट प्राप्त किया।

श्रीमान न्यायलय ने यह भी नोट किया कि यह एक निर्विवाद है कि लोन आरोपी कंपनी के पक्ष में स्वीकृत किया गया था तथा  संपत्ति से संबंधित टाइटल डीड व अन्य जाली , फर्जी दस्तावेज संबंधित Bank को मुख्य आरोपी व्यक्ति द्वारा की गई समुचित व्यवस्था पर सौंपे गए थे।

Wrong Legal Advice – केंद्रीय जांच ब्यूरो ( CBI ) हैदराबाद verses के. नारायण राव में Supreme Court का निर्णय, जिसमें यह सर्वोच्च न्यायालय ने अन्य बातों के साथ यह भी कहा कि Bank के पैनल अधिवक्ताओं के खिलाफ इस प्रकार के गंजे व सर्वव्यापी आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा ( Criminal Case ) नहीं चलाया जाना चाहिए।

और आगे बढ़ने की अनुमति दी गई क्योंकि यह माननीय न्यायलय की कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है तथा इस प्रकार के अभियोजन के निष्फल व निरर्थक होने की संभावना अधिक है।

नतीजतन निर्णय, न्यायलय ने याचिकाकर्ता वकील के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को ख़ारिज कर दिया।