( Cheque Bounce) चेक बाउंस केस से बचने के उपाय | Best 2021
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( Cheque Bounce) चेक बाउंस केस से बचने के उपाय | Best 2021
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Cheque Bounce Case in Hindi – चेक बाउंस केस में आप अपने रूपए कम समय में कैसे पा सकते है। क्या होती है कानूनी प्रक्रिया व आधार तथा कोर्ट में केस कैसे जीतें। आपको सभी प्रश्नों के जवाब इस आर्टिकल में मिलेगें।

Cheque Bounce ( images 1 )

Cheque Bounce Case in Hindi – वर्तमान समय में चेक बाउंस के केस अधिक देखने को मिलते है। किसी भी व्यपारिक कार्य को करने व नकद भुगतान करने के लिए चेक का प्रयोग किया जाता है। BUT चेक Dishonor होने से कोर्ट केस की लाईन लगी हुई है। चेक बाउंस होने पर हमें क्या करना चाहिए व इसकी कानूनी प्रक्रिया क्या होती है।आपको स्टेप by स्टेप जानकारी प्रदान की जाएगी।

चेक बाउंस क्या है।

Cheque Bounce Case in Hindi – किसी व्यक्ति को उसके परिश्रम के लिए रूपए का भुगतान करना होता है। तथा देनदार द्वारा रूपए को चेक द्वारा देता है। व्यक्ति उस चेक को बैंक में जमा करता है। और चेक किसी भी कारण से कैंसिल हो जाता है। वह बैंक भाषा में चेक बाउंस माना जाता है।

( उदाहरण – 1 )

माना – R ने किसी कार्य के फलस्वरूप 15000 रूपए की धनराशि का भुगतान किया है। और माना – K को चेक के माध्यम से करता है। जब K चेक में लिखी राशि को सम्बंधित बैंक में जमा करता है। – R के अकाउंट में पर्याप्त रूपए न होने के कारण चेक को कैंसिल कर दिया जाता है। और यह चेक बाउंस माना जाता है।


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निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट ACT – 1881 की धारा – 138 क्या है।

Cheque Bounce Case in Hindi – चेक बाउंस केस निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट ACT – 1881 के अंतर्गत आता है। इस अधिनियम के अनुसार चेक बाउंस को अपराध की श्रेणी में रखा जाता है। व धारा – 138 के तहत कानूनी कार्यवाही की जाती है। व्यक्ति को ( 2 साल की सजा या जुर्माना ) दोनों ही हो सकते है। कानूनी तरीके से आप दोषी व्यक्ति से अपने रूपए लेने का हक है। तथा भारत सरकार ने धारा – 138 NI ACT का निर्माण किया है।

cheque bounce new law in India 2020

Cheque Bounce Case in Hindi – Section – 138 ( क ) अनुसार आप चेक में लिखी समयावधि 3 माह के अन्दर ही रूपए कैश करा सकते है। इसकी टाइम लिमिट समाप्त होने के बाद यह मान्य नहीं होता है।


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चेक बाउंस कैंसिल होने के क्या कारण है।

Cheque Bounce Case in Hindi – चेक बाउंस होने के विभिन्न कारण हो सकते है। यद्यपि यह सामान्यतः अपराध की शाखा में आता है। और चेक बाउंस के बढ़ते केस की रोकथाम के लिए सजा का प्रावधाम किया है।

👦 – आप चेक पर अपने हस्ताक्षर करते है। और वह बैंक में फीड आपके डाटा ( पासबुक ) से मैच नहीं हो पाते है। और आपका चेक निरस्त ( कैंसिल ) कर दिया जाता है।

👧 – आप अपने चेक पर ओवरराइटिंग करते है और बैंक ओवरराइटिंग चेक नहीं लेता है और चेक कैंसिल कर दिया जाता है।

👨 – आप चेकका टाइम ख़त्म होने के बाद अर्थात ( 3 माह ) बैंक में जमा करते है।बैंक इस प्रकार के किसी भी चेक नहीं लेता है।

👩 – बैंक में डॉक्मेंट्स कम होना या K.Y.C नहीं होने से आपका खाता बंद कर दिया गया हो और आपको सूचना देर में मिलती है। और उस स्थिति में चेक कैंसिल कर दिया जाता है।

👸 – आपके बैंक खाता में चेक में लिखी धनराशि से कम रूपए हो | आपका चेक कैंसिल कर दिया जाता है।

👷 – आपको चेक देने वाले व्यक्ति पर विश्वास न हो और बैंक में आपने सूचना देकर चेक राशि का भुगतान रोक दिया हो | उस स्थिति में भी बैंक द्वारा चेक बाउंस कर दिया जाता है।

👰 – आपको चेक कम्पनी और उस चेक पर कम्पनी की मुहर नहीं है।ऐसे में बैंक चेक को अस्वीकार कर देता है।

👱 – आप जिस खाते के सयुक्त मालिक है। और चेक जारी करते समय सहखाताधारक व्यक्ति के साइन की आव्यशकता होती है। तथा एक ने ही साइन किया है। बैंक चेक कैंसिल कर देता है।

💁 – बैंक खाताधारक दिवालिया या विवादित केस में होने के कारण अकाउंट सीज कर दिए गए हो |

👼 – बैंक को चेक पर सन्देह है। या फर्जी लगता है। बैंक चेक रोक देता है।


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कोर्ट में केस फाइल करने के क्या आधार है।

Cheque Bounce Case in Hindi – कोर्ट में केस करने के तीन प्रमुख आधार बनाए गए है। वह निम्नलिखित है

( क ) 👉 आप धारा – 138 NI ACT में चेक बाउंस का केस कर सकते है।

( ख ) 👉 आप दीवानी ( केस ) मुकदमा अर्थात सिविल प्रोसीजर कोड , सिविल प्रक्रिया साहिता ( C.P.C ) के आर्डर – 37 में केस कर सकते है।

( ग ) 👉 आप धारा – 420 के अनुसार पुलिस में शिकायत करके FIR दर्ज करवा सकते है।

( cheque bounce notice )लीगल नोटिस

Cheque Bounce Case in Hindi – सबसे पहले आप दोषी व्यक्ति से सम्पर्क स्थापित करके बातचीत से अपनी समस्या का समाधान निकाले तथा दोषी व्यक्ति नहीं मानता ,राजी नहीं होता है। या वह चेक का समय निकालने के लिए गुमराह / भ्रमित करना चाहता है। आप दोषी व्यक्ति को कानूनी नोटिस भेज सकते है। कानूनी नोटिस में ( 15 दिनों के अन्दर ) जवाब व नोटिस का खर्च माँग सकते है।

Cheque Bounce Case in Hindi – आपने लीगल नोटिस भेजा होगा रजिस्ट्री द्वारा , या स्पीड पोस्ट , व कुरियर तथा साथ में रजिस्टर एडी लगाकर भेजा जाता है। और आपको जो रसीद मिलती है वह चेक बाउंस के केस में कानूनी दस्तावेजों को पूरा करती है। तथा चेक देने वाले का नाम व पता सही होना चाहिए।

कोर्ट केस करने के लिए आवयशक डोकेमेन्ट्स क्या है।

Cheque Bounce Case in Hindi –

( 1 ) आपका चेक

( 2 ) चेक को बैंक में जमा करते समय भरी हुई स्लिप

( 3 ) आपके चेक बाउंस की स्लिप जिस पर बैंक की मुहर व साइन होते है।

( 4 ) लीगल नोटिस की कॉपी व आपने नोटिस कुरियर या रजिस्ट्री से भेजा उसकी रसीद

( 5 ) आपको दोषी पार्टी से नोटिस का जवाब मिला है। उसकी एक कॉपी

( 6 ) आपने दोषी पक्षकार से ( लेन -देन या कोई अग्रीमेंट ) हुआ उसकी कॉपी आदि

Cheque Bounce Case Supreem Court ( images 4 )

कोर्ट केस के लिए गवाहों का चुनाव किस प्रकार करें।

( 1 ) आप अपने बैंक के मैनेजर को गवाह बना सकते है।

( 2 ) आप दोषी पक्षकार के बैंक को , कारण की चेक बाउंस के कारण पर्याप्त सही थे।

( 3 ) आपने लीगल नोटिस दिया है। जिस माध्यम को चुना जैसे – पोस्ट ऑफिस , कुरियर सर्विस आदि

( 4 ) अन्य व्यक्ति जिसके सामने चेक दिया है।

आपको साथ में एक हलफनामा व एफिडेफिट ( Affidavit ) भी लगाना होता है।

आप C.P.C ऑर्डर – 37 में दीवानी मुकदमा कर सकते है।

Cheque Bounce Case in Hindi – आप चेक बाउंस केस के लिए दोषी व्यक्ति पर दीवानी मुकदमा भी कर सकते है। यह केस ( सिर्फ 4 माह की तारीखों ) में समाप्त हो जाता है। तथा कोर्ट द्वारा आपका रुपया ब्याज सहित मिलता है। आपको यह केस फाइल करने के लिए चेक बाउंस के रूपए के हिसाब से कोर्ट फीस जमा करनी होती है जिससे आमजन नागरिक इसमें केस कम ही डालते है। आपको कोर्ट में केस जितने के बाद कोर्ट फीस वापस मिल जाती है।


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धारा – 420 में शिकायत दर्ज़ करवा सकते है।

Cheque Bounce Case in Hindi – आप दोषी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस स्टेशन में छल -कपट व बेईमानी करना के अपराध में शिकायत लिखवा सकते है पर पुलिस वाले शिकायत दर्ज न दर्ज कर कहती है – चेक बाउंस में कोर्ट में केस डाल दो , वह इसलिय कहती है क्योकि सभी कानूनी नियम नहीं जानते है। BUT कोर्ट से आर्डर मिलने के बाद FIR को दर्ज करती है। इस प्रकार दोषी व्यक्ति पर दबाव बनाया जाता है। जिससे जल्दी रूपए मिल सकें।

प्रश्नः -वकील साहब ,धारा 138 में जमानत कैसे मिलती है?

ANSWER – Cheque Bounce Case – आपके वकील द्वारा आपके केस की स्टडी करके उचित तर्क प्रस्तुत किए जाते है। न्यायलय आपके वकील के तर्क से सहमत है। वह आपकी जमानत मंजूर कर लेता है। और आपको जमानत मुचलके न्यायलय के आदेशनुसार उतनी राशि के जमानती तथा दस्तावेज जमा करने होते है। और आपसे कहा जाता है। की जब न्यायलय कोर्ट में बुलाएगी आपको हाजिर होना होगा।

चेक बाउंस होने पर क्या जुर्माना है?

Cheque Bounce Case में दोषी व्यक्ति को ( 2 वर्ष की सजा ) तथा चेक राशि का दोगुना शिकायतकर्ता को मिलता है। इसमें बैंक को यह भी अधिकार है। कि वह बार -बार चेक बाउंस के अपराध के कारण आपका बैंक खाता बंद करदे या चेक बुक बंद कर सकती है।

Cheque Bounce Case के अपराध जमानतीय होते है।यह असंज्ञेय अपराध की शाखा में आते है। कोर्ट में वकील के तर्क स्वीकार कर जमानत मिलने में आपको कोई असुविधा नहीं होती है।


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प्रश्नः – वकील साहब , किसी ने चेक बाउंस का झूठा केस किया वह किस प्रकार जीतें ?

Answer – Cheque Bounce Case में आपको यह साबित करना होता है। यह चेक सिक्योर्टी के लिए जमा किया था। इसलिय यह चेक एक सिक्योर्टी है। आप कोर्ट को यह बताए की शिकायतकर्ता से मैने कोई चेक नहीं दिया है। यह चेक मैने किसी दूसरे को या अपने चिर -परिचित / सम्बन्धी को दिया था। मेरे चेक का गलत प्रयोग हुआ है।
( 2 )  Cheque Bounce – आप कोर्ट से कहें की चेक पर मैने कोई नाम नहीं लिखा है। आप बताए की चेक खो जाने की शिकायत पुलिस को दी थी। आप वकील के माध्यम से कोर्ट में कहे की शिकायतकर्ता रूपए मांग रहा है यह रूपए टैक्स पे के अन्तर्गत आता है। रूपए टैक्स पे नहीं तो यह ब्लैकमनी है। और कोर्ट इस प्रकार के रूपए की रिकवरी नहीं करवाता है।

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चेक बाउंस केस धारा – 138 में सावधानियाँ

Cheque Bounce Case में हम आपको कुछ सावधानियाँ रखने के Tips दें रहे है। यह हमारी एक्सपर्ट टीम द्वारा अनुभव के आधार पर है।
😀 आप यह केस किसी कम्पनी के ऊपर कर रहे है। आप चेक बाउंस के साथ धारा – 142 का भी प्रयोग करें यह धारा कम्पनी को दोषसिद्ध बनाती है।
👮 कम्पनी से सम्बन्धित मामलों में कम्पनी के आधार पर व कम्पनी के व्यक्ति ने आपको चेक दिया है। आपके लिए यह आवयशक हो जाता है। की पहला दोषी कम्पनी तथा दूसरा दोषी चेक देने वाले व्यक्ति को बनाए
😎 आपने कुछ लोगों से  या इस प्रकार सोचते है। चेक को बार -बार बाउंस करवाने से केस स्ट्रांग बनता है। यह धारणा गलत है। चेक का एक बार ही बाउंस होना ही काफी होता है।
👳 आपके चेक पर तारीख  नहीं लिखी है अर्थात पोस्ट डेटेड है। आप केस के दरमियान यह न बताए की दोषी व्यक्ति की गैर – हाजरी में तारीख लिखीं है। आप यह कह सकते है। शिकायतकर्ता ने स्वयं या उसके उपस्थिति में लिखी है।
👴 आप चेक बाउंस में केस किसी समस्या के कारण कोई कानूनी प्रक्रिया जैसे – लीगल नोटिस भेजना , समय पर कोर्ट केस करना आदि आप इसकी चिंता न करें। आप कोर्ट में धारा – 5 मियाद अधिनियम ( लिमिटेशन एक्ट ) द्वारा कवर कर सकते है।

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चेक बाउंस केस में कोर्ट फीस कितनी होती है।

Cheque Bounce केस में यह महत्वपूर्ण विषय होता है। की न्यायलय द्वारा कितनी राशि पर कोर्ट फीस लगती है। न्यायलय द्वारा तीन स्तर को चुना गया है। वह इस प्रकार है।
( 1 ) – 1 लाख रूपए तक की चेक राशि के लिए 5 % कोर्ट फीस चुकानी होती है।
( 2 ) – 1 लाख से 5 लाख तक की चेक राशि के लिए 4 % कोर्ट फीस चुकानी होती है।
( 3 ) – 5 लाख से अधिक राशि के लिए 3 % कोर्ट फीस चुकानी होती है।
निष्कर्ष
आशा करते है। चेक बाउंस से सम्बन्धित सभी जानकारी आपको प्रदान की गयी है। आपको हमारे द्वारा इस आर्टिकल की जानकारी अच्छी लगे तो कृपया LIKE और SHARE जरूर करे।
जय हिन्द जय भारत
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