जम्मू, कश्मीर High Court, Crpc 102 के तहत आरोपी के रिश्तेदारों के बैंक खाता जब्त किया जा सकता है | Best Law 2022
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जम्मू, कश्मीर High Court, Crpc 102 के तहत आरोपी के रिश्तेदारों के बैंक खाता जब्त किया जा सकता है | Best Law 2022
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Crpc 102 in Hindi – सीआरपीसी 102 के तहत आरोपी से सम्बंधित किसी भी रिश्तेदारों के बैंक खाते को जब्त करने का अधिकार है। एक आरोपी के मामले की सुनवाई के समय जम्मू, कश्मीर And लद्दाख हाई कोर्ट निर्णय में कहा गया है।

Crpc 102 – सीआरपीसी 102 के तहत आरोपी से सम्बंधित किसी भी रिश्तेदारों के बैंक खाते को जब्त करने का अधिकार है। एक आरोपी के मामले की सुनवाई के समय जम्मू, कश्मीर And लद्दाख हाई कोर्ट निर्णय में कहा गया है।

Crpc 102 – Justice संजय धर की खंडपीठ ने आगे कहा कि जांच समीक्षा के दौरान एक पुलिस Officer आरोपी के रिश्तेदारों के उक्त खाते को जब्त या फिर प्रतिबंधित कर सकता है, अगर ऐसी कोई संपत्ति का उस अपराध के साथ सीधा संबंध है, जिसकी पुलिस जांच समीक्षा कर रही है।

संक्षेप में क्या है मामला :- 

Crpc 102 in Hindi – अपराध विभाग , कश्मीर को साल – 2015 के एक सरकारी Order के जारी होने के बाद जेकेपीसीसी द्वारा निष्पादित या फिर अनुबंधित सभी कार्यों की जांच समीक्षा करने के लिए कहा गया था

ताकि वह यह निर्धारित एसओपी/ प्रक्रिया के उल्लंघन में ठेके देने में की गई अनियमितताओं की पहचान की जा सके व इसके तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।


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Crpc 102 in Hindi – याचिकाकर्ता एक (कैसर अहमद शेख व बशीर अहमद वार) जम्मू  & कश्मीर के प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (जेकेपीसीसी) के कर्मचारी थे और पूछताछ के समय उनकी गलतियों के कृत्य सामने आए, और जिसमें प्रथम दृष्टया संज्ञेय Crime का खुलासा हुआ। जिसके बाद उन पर धारा – 420, व 468, व 120-बी आरपीसी व 5(2)(डी) पीसी Act के तहत मामला दर्ज किया गया।

जांच के समय आरोपी बशीर अहमद वार, व उसकी पत्नी नीलोफर बशीर (मामले में एक याचिकाकर्ता), तथा कैसर अहमद शेख व उसकी पत्नी इशरत आरा (एक याचिकाकर्ता) से संबंधित BANK खातों को संदिग्ध क्रेडिट देखने के बाद फ्रीज कर दिया गया था। 

Crpc 102 in Hindi – अब इस पर सभी चार याचिकाकर्ताओं ने अपने BANK खातों को डीफ्रीज करने के लिए विशेष न्यायाधीश, व भ्रष्टाचार, और कश्मीर, व श्रीनगर से संपर्क किया, BUT उनका आवेदन खारिज कर दिया गया। जिसके बाद वे High Court चले गए।

Crpc 102 in Hindi – मामले में यह मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता नीलोफर जान व  इशरत आरा जेकेपीसीसी के कर्मचारीगण नहीं हैं, बल्‍कि वह सरकारी शिक्षक के रूप में काम करती हैं, फिर भी उनके खाते बिना किसी उपयुक्त कारण के फ्रीज कर दिए गए।

न्यायालय की विशेस टिप्पणियां :-

Crpc 102 in Hindi – प्रारंभिक में, माननीय अदालत ने कहा कि एक पुलिस Officer मामले की जांच के समय किसी भी संपत्ति, जिसे यह चोरी होने का शक है या फिर जो किसी अपराध के होने का संदेह को पैदा करता है, उसे कार्यवाही करते हुए जब्त करने की शक्ति रखता है।

मौजूदा मामले में माननीय श्रीमान अदालत ने कहा कि पुलिस Officer ने उन सभी अधिकारियों व  उनके परिजनों के BANK खातों का विश्लेषण करना आवश्यक पाया, जो कार्य अपराध के समय प्रमुख पदों पर थे। इस उद्देश्य के लिए उनके BANK खातों की जब्ती नितांत आवश्यक थी। 

Court ने आगे कहा, – हालांकि याचिकाकर्ताओं ने इन सभी संदिग्ध लेनदेन के Relation में जांच एजेंसी को स्पष्टीकरण दिया है, फिर इस प्रकार की भी जांच एजेंसी इन प्रतिक्रियाओं या स्पष्टीकरणों को जैसे का तैसा स्वीकार नहीं कर सकती है।

Crpc 102 in Hindi – और उन्हें याचिकाकर्ताओं द्वारा किए गए इन सभी दावों की सच्चाई या फिर अन्यथा की पुष्टि  व  पता लगाना होगा। तब तक प्रतिवादी जांच एजेंसी के लिए BANK खातों को डीफ्रीज करना समय से पहले होगा |

Crpc 102 धारा के तहत पति-पत्नी के BANK खातों की जब्ती के संबंध में श्रीमान न्यायालय ने मामले में Supreme Court के फैसले को ध्यान में रखते हुए कहा कि महाराष्ट्र राज्य V / S तापस डी नियोगी, (199) 7 एससीसी 685, ने यह पाया गया है कि कि पुलिस Officer को ऐसा करने की शक्ति है।

नतीजतन, यह मामले में योग्यता नहीं पाते हुए श्रीमान अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

केस का शीर्षक- कैसर अहमद शेख And अन्य V / S थानेदार पी/एस अपराध शाखा कश्मीर, जुड़े मामले के साथ 

Download Judgement :-