( Divorce )भारत में आपसी सहमति से तलाक कैसे लें | Best 2021
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Divorce Kaise Le – Talak Kaise Le in Hindi – पति और पत्नी व बच्चें और परिवार के सभी सदस्य संघर्षो का सामना करते है। तलाक लेने की प्रक्रिया लंबी होती है। यह शोध से स्पस्ट भी हुआ है।

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तलाक कैसे होता है। talak kaise hota hai – तलाक कैसे लें – Divorce Process in Hindi – तलाक का केस होने पर बच्चों की कस्टडी कैसे ले। समझे कोर्ट प्रक्रिया को court में तलाक कैसे प्राप्त होता है। तलाक कितने प्रकार के होते है।

तलाक शब्द – मार्गदर्शन का उद्देश्य आपको यह बताना है। एक Marriage Couples ( विवाहित जोड़ा ) हिंदू मेर्रिज एक्ट – 1955 के अनुसार विवाह हुआ वह तलाक के लिए court case फाइल कर सकता है।
पति / पत्नी के बीच सम्बन्ध ठीक नहीं है। और घर / परिवार व अन्य सदस्यों से पत्नी के कार्यो को लेकर झगड़ा आदि होता है। और आप इस आपसी विवाद से परेशान होकर हिंदू विवाह एक्ट – 1955 के अनुसार केस फाइल करें।

India में पति / पत्नी का आपस में Divorce लेना कोई आसान Work नहीं है। India में Divorce से सम्बंधित कानून बनाए गए है। जिस कारण Divorce लेने की प्रक्रिया लंबी हुई है। पति / पत्नी के लिए परेशानी का मुख्य कारण – बच्चों की कस्टडी लेना , पत्नी द्वारा गुजारा भत्ता की मांग करना , पति / पत्नी का एक दूसरे पर कई प्रकार से केस कर देना इत्यादि |

आज इस लेख के माध्यम से Talak  केस में शामिल सभी जानकारी को जानेगे। इसलिए आप इस जानकारी को पूरा पढ़े। इस जानकारी में आपको अपनी Question का Answer मिल जाए।
Talak  कितने प्रकार के होते है। – Indian जूरी ऑफिसर ने तलाक के Process को दो भागों में बाँटा है।

1 – आपसी सहमति से लिया गया तलाक

2 – बिना सहमति से लिया गया तलाक

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पति / पत्नी की आपसी सहमति से लिया गया तलाक

आपसी सहमति से तलाक लेने की Process बहुत ही Simple है। इसमें Court कचहरी के चककर नहीं लगाने पड़ते है। आपने हाल ही में सुना होगा – Bill Gates और पत्नी Melinda Gates ने आपसी सहमति से Divorce लिया है।
Hindu Marriage Act – 1955 के ( Section – 13 ) ( बी ) आपसी सहमति से तलाक के Kanoon सम्मिलित किए गए है।

आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए अपने जिले के Family Court में आवेदन देना होता है और उस आवेदन में विवाह सम्बध को समाप्त करने का कारण लिखना होता है। और अदालत द्वारा एक डिक्री पारित कर दी जाती है। 


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सहमति से Divorce लेने में कितना समय लगता है।

पति / पत्नी द्वारा अदालत में Divorce के लिए आवेदन जमा किया जाता है। जिस तारीख को आपने आवेदन जमा किया है उस तारीख से ( 6 महीने से 18 महीने ) का आपको इतजार करना होता है। वो इसलिए court आपसी मतभेद को दूर कर सुलह का समय प्रदान करता है।

आपका आवेदन इस समयवधि वापस नहीं होता है। आपको अदालत Divorce का आदेश दे देती है।

शून्य समयवधि क्या है। ?

Talak के लिए याचिका दायर करने के बाद 6 महीने का समय मिलता है। इस इंतजार के समय को ही शून्य समयवधि कहा जाता है।

पति / पत्नी ( 1 वर्ष ) या उससे अधिक समय तक अलग रह रहे है तो अदालत द्वारा इस पर विचार किया जा सकता है।

Section – 13 ( बी ) ( 2 ) में अदालत ने स्पस्ट किया है। यह एक निदेश सहिंता है। जिसमे अदालत मामले के तथ्यों / परिस्थितियों में सविवेक का प्रयोग करती है।

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एकतरफा पति / पत्नी द्वारा बिना सहमति से लिया गया तलाक

यह Case पति / पत्नी दोनों के लिए संघर्षपूर्ण होता है। वजह तलाक के लिए दोनों पक्ष एक – दूसरे पर आरोप – प्रत्यारोप करते है।

तलाक लेने के आधार

( A ) आपका साथी झगड़ा करता हो |

( B ) आपके साथ मारपीट करता हो |

( C ) आपको शारीरिक / मानसिक रूप से यातना देता हो |

( D ) आपके साथी की मानसिक स्थिति ख़राब है। वह नपुंसक हो , वह चरित्रहीन हो , व अन्य कारण |

पक्ष / विपक्ष किस प्रकार केस जीत सकता है।

1 – प्रथम कार्य तलाक लेने का आधार चुनें और उस आधार से सम्बंधित सभी सबूत इकठ्ठा करें। व केस फाइल करते समय उसको लगाएं यह आपके केस को Strong करेगा।
2 – आपका आवेदन जमा होने के बाद कोर्ट आपके विपक्ष को Legal Notice भेजेगा। दूसरा पक्ष कोर्ट में हाजिर नहीं होता है और यह केस आपके पक्ष में चला जाता है।
3 – आप कोर्ट में गवाह भी प्रस्तुत कर सकते है।

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तलाक लेते समय किन मुश्किलों का सामना होता है।

आपने फिल्मो में या TV सीरियल में पति से गुजारा भत्ता माँगना व बच्चों की कस्टडी के लिए संघर्ष जरूर देखा होगा। सभी पति / पत्नी को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है। अदालत में Divorce के केस की सुनवाई दौरान बच्चों की कस्टडी व गुजारे भत्ते के लिए वाद – विवाद जरूर होता है। But गुजारा भत्ता पति ही Pay करता है। 


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गुजारा भत्ता

गुजारे भत्ते की दर पति की Income पर निर्भर होती है इसलिए गुजारा भत्ता की कोई सीमा तय नहीं की गई है। आपसी Divorce में पति / पत्नी मिलकर गुजारे भत्ते की रकम तय कर लेते है। और बिना सहमति के तलाक में कोर्ट द्वारा पति का मैंटीनैंस तय किया जाता है।

बच्चों की कस्टडी

पति / पत्नी के लिए यह दूसरी Problems होती है आपसी Divorce में माता – पिता मिलकर बच्चो की जिम्मेदारी बाँट लेते है। यह माता – पिता की मानसिक सोच पर निर्भर करता है। और अदालत द्वारा ज्वॉइंट कस्टडी मिल जाती है। और कोर्ट इसे ( शेयर चाइल्ड कस्टडी कहती है। )
बिना सहमति के Divorce में कोर्ट दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद बच्चो की जिम्मेदारी नियुक्त करती है। बच्चे की उम्र – 5 साल से कम है या बच्चा माँ का दूध पीता है कोर्ट बच्चे की स्थिति देखकर बच्चे की कस्टडी माँ को देती है। और बच्चे की उम्र – 5 साल से अधिक है। कोर्ट बच्चे की मर्जी जानकर बच्चे की कस्टडी उसे सौप देता है।

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