Domestic Violence Actपत्त्नी को लगा 10 लाख का चूना|Best 2021
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Domestic Violence Actपत्त्नी को लगा 10 लाख का चूना|Best 2021
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Domestic Violence Act – कोर्ट ने पत्त्नी को कानून का विपरीत दिशा में प्रयोग करने पर 10 लाख रूपए का अर्थदण्ड लगाया और कोर्ट ने कहा -हम कानून के समान तर्क में विश्वास रखते है। 

Domestic Violence Act – श्रीनगर की एक कोर्ट ने ऐतिहासिक आर्डर दिया है। और उस याची महिला पर 10 लाख रूपए से दण्डित किया है। महिला ने अपने ही पति को घरेलू हिँसा अधिनियम जो की महिला सुरक्षा संशोधन अधिनियम – 2005 के अंतर्गत मामले को कोर्ट में दावा पेश कर उस पति को अपने ही घर से बेदखल करवा दिया था। 

Domestic Violence Act – महिला से सम्बंधित आदेश को लेकर यह मामला तब सामने आया है। जब महिला अपने विवाद को सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य अदालतों में घसीट कर लें गई। और विभिन्न कोर्ट द्वारा मिले आदेशों कर्यवान्वय श्रृंखला को रोकने से सम्बन्धित मामले को वापस करने का आदेश प्राप्त करना चाहती थी। 

Domestic Violence Act – श्रीनगर की एक अदालत ( स्मॉल कॉज Court ) की अध्यक्षता वाली पीठ की जज जिनका नाम फ़ैयाज़ अहमद कुरैशी है। जज द्वारा 18 पन्नो का एक ऑर्डर पारित किया व कोर्ट द्वारा दिए ऑर्डर में पत्त्नी को 10 लाख रूपए चुकाने व पालन करने का दिशा निर्देश दिया था या यह जुर्माना भू – राजस्व की अभिनिर्धारित प्रकार से वसूल किया जाएगा। 

कोर्ट ने वाद का परीक्षण किया और कहा – यह विवाद का मामला कानूनी प्रक्रिया का दुर्भाग्यपुर्ण दुरूपयोग की एक मिसाल है। 


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Domestic Violence Act – यह अधिनियम से स्वतः स्पष्ट होता है। की महिला सुरक्षा सँरक्षण घरेलू हिंसा Act – 2005 संशोधन प्रक्रिया का उद्देश्य महिलाओ को एक सामान्य ऐसे घरेलू सम्बधो में होने वाली पीड़ा , हिँसा से बचाना है। यह एक प्रकार से सही और वास्तविक सत्य मामले को सँभालने के लिए है। 

Domestic Violence Act – जिसमें पीड़ित पक्ष ऐसे कार्यो में निहित नहीं होता है। जो इस प्रकार से कानून के मकसद को कमजोर करते है। घरेलू हिँसा अधिनियम को इसलिए निर्माण किया गया है कि – पत्नी या पति को प्रताड़ित करने या पीड़ित पक्ष प्रतिवादी को अपने ही घर से बाहर निकालने के लिए , यह कानून पति – पत्त्नी के आपसी संघर्ष को बढ़ाने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया है। 

कोर्ट के आदेश की रूप -रेखा 

Domestic Violence Act – अदालत ने दिनांक  – 23 March के ऑर्डर को दिनांक – 29 April 2019 संशोधित किया व न्यायलय ने April में Order दिया की दोनो पति – पत्नी एक दूसरे को अनुसाशन प्रणाली से समायोजित हो , तथा पत्त्नी पति को घर में रहने के लिए दो कमरे भी दें। 

पत्त्नी ने इसी Order के विशेसधिकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। BUT पत्त्नी यह अपील हार गई। 


Read Me – Download Order 


Domestic Violence Act – इसका नतीजा यह हुआ की – प्रतिवादी पक्ष पति ने अपने दिनांक – 29 April 2019 के Order को सुचारू रूप से लागू करने के लिए न्यायलय के समक्ष अपील दायर की थी। 

Domestic Violence Act – उस अपील को स्वीकार करते हुए , न्यायलय ने सम्बन्धित एस .एच .ओ को दिनाँक – 15 -11 2021 को दिनाँक – 29 April 2019 के Order को पालन करने के लिए कहा तथा पति ने इस बिंदु को आधार मानकर वर्तमान समय में अपील डाल कर प्रार्थना की पत्नी की याचिका वापस ले ली जाय। 

Domestic Violence Act – जिस दिन विवाद का प्रारम्भ हुआ उस स्थिति की तारीख को ध्यान में रखकर दोनों पक्षों को साझा – घर के कब्जे की स्थिति को बहाल किया गया। 

Domestic Violence Act – Order में यह भी साफ माना गया की यह कानूनी विवाद का मामला पूर्ण रूप से Law का मिसयूज है। और जहाँ एक पत्नी ने कानून की कार्यवाही को लोच की अधिक से अधिक सीमा तक विस्तार का रूप प्रदान किया है। तथा एक घरेलू हिँसा अपील एक सीढ़ी के प्रारम्भिक दौर में है। और विवाद को भारत देश की , सुप्रीम कोर्ट तक घसीटा गया है। और वादिनी पत्नी ने यह भी तीव्र आदतन इच्छा व्यक्त की पति साझा – घराने से बेदखल रहे , चाहे वह पति पक्ष के स्वामित्व में क्यों न हो |

Allahabad High Court Judgment – तथ्य छुपाकर मुआवजा रकम हड़पने की कोशिश में लगा 10 हजार रूपए का जुर्माना

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किसी भी हुई डील / बात को छुपाकर अपील दायर करने को लेकर बहुत नाराजगी जाहिर की है। हाई कोर्ट ने अपीलीय याचिका 10 हजार रूपए के जुर्माने के साथ ख़ारिज की है। और यह आर्डर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र व जस्टिस विक्रम डी चौहान की खण्डपीठ द्वारा दिया गया। 

यह मामला गोरखपुर के राम रतन व 83 अन्य की अपील पर फैसला दिनाँक – 10 /12 /2021 को दिया है। 

क्या है पूरा मामला ?

एडवोकेट विभु राय जी ने गोरखपुर नगर – निगम की तरफ से अपीलीय याचिका पर बहस की व जिसमे कहा गया था कि सभी पीड़ितों की जमीन बिना मुआवजा दिए जबरन कब्ज़ा कर ली जा रही है। नगर निगम प्राप्त की जा रही जमीन पर सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट का एक प्लान्ट तैयार करना चाहता है। जबकि पीड़ित इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। याचकर्ताओ का आरोप है। की उन्हें अपनी जमीन बेचने को मजबूर किया जा रहा है। 

कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए तुरन्त एक्शन लिया और गोरखपुर जिलाधिकारी हलफनामे द्वारा इस घटनाक्रम की सही पुष्टि करने के निर्देश दिया , गोरखपुर D.M द्वारा इसकी सही जानकारी कोर्ट को एक हलफनामे द्वारा दी और कहा की – 

यह प्लान्ट गोरखपुर के सुथनी ग्राम के 108 किसानों की जमीन पर लगाया जा रहा है। सभी ने अपनी इच्छा से जमीन बेची जिसका रुपया इनके अकाउंट जमा करवा दिया गया है। और विक्रय पत्र की नकल अदालत में जमा की गई। अपीलीय याचियों की भ्रामक सूचना व तथ्य छुपाकर कानूनी कार्यवाही पर बेहद नाराज नजर आई | 

अदालत ने कहा की – इस प्रकार के कार्य से सही दिशा वाले पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी हो जाती है। न्यायलय परिसर में केवल साफ दिल वालों का स्वागत होता है। और उन्हें ही राहत मिल पाती है। इस प्रकार की याचिकाओँ से अदालत का समय बर्बाद होता है। 

अतः कोर्ट ने 10 हजार रुपया का दण्ड लगाकर अपील को ख़ारिज कर दिया |