बाबा साहेब और ( Hindu Code Bill )की ऐतिहासिक जंग | Best 2022
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बाबा साहेब और ( Hindu Code Bill )की ऐतिहासिक जंग | Best 2022
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Hindu Code Bill – डा o भीमराव अम्बेडकर साहब ने पहली बार संसद में हिन्दू कोड बिल महिलाओं के अधिकार दिलाने सम्बन्धी पेश किया था। जिसकी लड़ाई उन्होंने भारत आजाद होने तक लड़ी | जो इतिहास के पन्नो में सुनहरे अक्षरों से लिखी गई है। 

बाबा साहेब , अम्बेडकर जी ने कानून मंत्री पदभार सवरूप हिन्दू कोड बिल ( Hindu Code Bill ) संसद में पेश किया था। वह कानून की डिग्री ऑक्सफोर्ड यूनिवर्स्टी से प्राप्त कर भारत आए थे। सन – 1932 से 1956 के दौर में बाबा साहेब , डा o भीमराव अम्बेडकर जी कानून मंत्री बने , तथा समाज में बने महिलाओं की प्रति विंसगतियों से परेशान रहते थे। वह उनमें सुधार की प्रक्रिया को जन्म देना चाहते थे। 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिलाओँ को पैतृक संपत्ति में अधिकार देने सम्बन्धी अधिकारों को स्ट्रॉन्ग किया बल्कि मजबूत भी किया और यह भी कहा की पैतृक संपत्ति विरासत के सन – 1956 से पहले के मामलों पर भी हक जता सकती है। पर शायद आपको यह जानकारी नहीं है। की जब बाबा साहेब ने हिन्दू महिलाओँ को भी पिता की संपत्ति में अधिकार मिलने सम्बन्धी ( Hindu Code Bill ) , हिन्दू कोड बिल पेश किया संसद में तो इसका बड़ा भारी विरोध हुआ | 

Hindu Code Bill V/s Dr. Bhimrao Ambedkar – बाबा साहेब की सरकार से जंग

Hindu Code Bill in Hindi – बाबा साहेब ने विचार किया की सुबह के समय दिनाँक – 15 अगस्त 1947 को हम आजाद थे , है , और रहेंगे | भारत देश की आधे से अधिक जनता अपनी साम्प्रदायिक रूढ़िवादी विचारधाराओं में कैद थी। भारतीय स्त्री की दशा समाजिक व आर्थिक तथा राजनितिक सभी क्षेत्रो में अधिकार नाम मात्र के थे। 


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डा o भीमराव अम्बेडकर जी ने इन सभी भागते मुद्दों को समेटा और एक अधिनियम का निर्माण किया और इसका नाम रखा ( Hindu Code Bill ) , हिन्दू  कोड बिल कहलाया इस विधेयक को संसद में पेश किया। जितनी शक्ति से बाबा साहेब ने यह बिल पेश किया उतने ही प्रबल वेग से इसका विरोध शुरू हुआ और बिल के बढ़ते विरोध को देखते हुए बिल को रोक दिया गया। इस बात से आहत होकर उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 

Hindu Code Bill Kya Hai – हिन्दू कोड बिल क्या है।

हिन्दू कोड बिल में पुरुषो के समान ही महिलाओँ को अधिकार प्रदान किया गया था। बेटी को भी अपने पिता की संपत्ति में अधिकार मिलेगा साथ ही समानता के अधिकारों में वृद्धि करते हुए शिक्षा व नौकरी में भी स्थान मिलेगा। हिन्दू कोड बिल विवाह व तलाक सम्बन्धी अधिकारों का वर्णन किया गया था। अगर हम कहे की वर्तमान समय का हिन्दू लॉ ( Hindu Code Bill ) का ही मॉर्डन भाग है गलत नहीं होगा। 

धार्मिक संगठनों का हिन्दू कोड बिल का बहिष्कार

Hindu Code Bill का विरोध करने के बहुत सारे संगठन सक्रिय हो गए। हिन्दू कोड बिल को न मानने वालो में धार्मिक नेता यहां तक की साधु – संत भी इस विरोध में कूद पड़े , लगातार जगहों – जगहों पर जुलुस , धरना प्रदर्शन होने लगे तथा यह आरोप लगाने लगे की हमारे धर्म को भ्रस्ट करने के मकसद से यह बिल लाया जा रहा है। 

Hindu Code Bill ( images 1 )

स्वामी करपात्री महाराज विरोध के संघर्ष में सबसे आगे खड़े थे। वह अपने आप को हिन्दू धर्म का पैरोकार बताते थे। और ( Hindu Code Bill ) हिन्दू कोड बिल का बहिष्कार करते थे। साल 1949 के मार्च माह में ( All India एंटी Hindu Code Bill ) एक ऐसी कमेठी का गठन हो गया जो जो इस बिल के खिलाफ थी। करपात्री महाराज देशभर में घूमकर इस बिल को हिन्दू परंपरा के खिलाफ बताते और कहते ( Hindu Code Bill ) प्राचीन प्रथाओं , रिवाजों , व धर्मशास्त्रों के अनुसार नहीं है। 

प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी ने हिन्दू कोड बिल का विघटन किया || First Indian Prime Minister Jawaharlal Nehru Disbanded the Hindu Code Bill

प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी ने बढ़ते विरोध के चलते व आगामी चुनाव की प्रक्रिया में हार होने की दशा में इस बिल को पास करने से रोक दिया , जिसको लेकर बाबा साहेब ने नेहरू जी को चिट्टी लिखकर अपनी संवेदना व्यक्त की और पद का त्याग किया। 


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नेहरू जी बिल को पसंद करते थे परन्तु जनादेश के विरोध ने उनके हाथ बांध लिए थे। इसलिय जब साल – 1952 में फिर से नेहरू सरकार आयी तो इन्होने ( Hindu Code Bill ) को कई हिस्सों में बाँट दिया जो आज के समय में लागू होते है। जैसे – 

1 – हिन्दू मैरिज एक्ट – 1955 , Hindu Marriage Act – 1955

2 – हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम – 1956 , Hindu Succession Act – 1956 

3 – हिन्दू दत्तक ग़हण व पोषण एक्ट , Hindu Adoption and Nutrition Act 

4 – हिन्दू अवयस्कता और संरक्षता एक्ट , Hindu Minority and Protection Act 

यह सभी कानून महिलाओं के अधिकारों में इजाफा करते थे। यह कानून भारतीय समाज में स्त्रियों को अपने सम्मान की रक्षा व अधिकारों को दिलाने में संपन्न थे। इस प्रकार पहली बार भारतीय नारियों को संपत्ति में हिस्सा मिलना प्रारम्भ हुआ। 

सुप्रीम कोर्ट जजमेंट – हिन्दू उत्तराधिकार संशोधन एक्ट – 2005 क्या कहता है।

11 अगस्त 2020 को माननीय सर्वोच्च न्यायलय ने हिन्दू उत्तराधिकार संशोधन एक्ट – 2005 की व्याख्या करते हुए कहा की – पुरुषों के समान ही महिलाओँ को पैतृक संपत्ति में अधिकार मिलने का विस्तार किया गया है। और जिसका सम्बन्ध हिन्दू उत्तराधिकार संशोधन एक्ट – 2005 से रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा एक हिन्दू महिला को जन्म से ही पिता की संपत्ति में अधिकार प्राप्त है। 

हिन्दू उत्तराधिकार एक्ट – 1956 के Section – 6 के अनुसार यह महिलाओँ के अधिकारों में निहित किसी भी भेदभाव को दूर करने का प्रयास करता है। वह इसलिय की बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार मिलें | यह आदेश संयुक्त हिन्दू फैमिली के साथ – साथ जैन , आर्य समाज , व बौद्ध और ब्रम्हा समाज आदि समुदायों पर लागू होता है।

Hindu Code Bill Cartoons images , 1932

Hindu Code Bill के विरोध में कार्टून्स की आई बाढ़

आज का समय में हमारा देश महिलाओँ के प्रति जितना उदार व लोकतान्त्रिक भावना का अधिकार प्रदान करता है। परन्तु बिता हुआ समय महिलाओँ के प्रति दुर्दशा का आईना दिखाता है। साल – 1910 या 20 में लड़कियों को शिक्षा दिलाने सम्बन्धी अभियान शुरू किया गया तो परिवार से या समाज से बहिष्कार का दंश झेलना पड़ा था। ऐसे में बाबा साहेब ने ( Hindu Code Bill ) 17 मार्च 1951 को संसद में दोबारा पेश किया , लेकिन कट्टरपंथियों के विरोध ने यह बिल पास नहीं हुआ , यहाँ तक की अखबारों ने बाबा साहेब के विरोध में इतने कार्टून्स मीम्स चालू किये की वह एक विलेन की भूमिका में ला खड़ा किया | 

निष्कर्ष 

सुप्रीम कोर्ट का महिलाओँ के अधिकारों के साथ , डा o भीमराव अम्बेडकर के ( Hindu Code Bill ) की जीत है। और यह समय की कसौटी पर महिलाओँ के सुन्दर भविष्य का महल तैयार करेगा जो आने वाले समय में महिलाओँ के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेगा | 

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