Muslim Girls अपनी मर्जी से शादी करने का हक | Best Law 2022
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Muslim Girls अपनी मर्जी से शादी करने का हक | Best Law 2022
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 15 साल की Muslim Girls अपनी मर्जी से शादी के लिए आजाद है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह कहा – और यह फैसला मुस्लिम लॉ के अनुसार किया गया है। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट 

मुस्लिम लड़कियों (Muslim Girls) की शादी ( Marriage ) को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने एक अहम फैसला सुनाया है. और हाई कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (Muslim Personal Law) के अनुसार  18 वर्ष से कम उम्र की लड़की ( Girls ) अपनी मर्जी से किसी भी लड़के से निकाह कर सकती है

और यह कानूनी रूप से परिवार इसमें दखलअंदाजी नहीं कर सकता. तथा कोर्ट ने कहा कि निकाह के लिए लड़की ( Girls ) का बालिग होना जरूरी नहीं है. यदि वह लड़की युवा हो चुकी है, और उसे अपना जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार है.

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ( Panjab and Haryana High Court ) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किशोरवय मुस्लिम युवती ( Muslim Girls ) अपनी मर्जी से शादी करने के लिए स्वतंत्र है और अगर उसे अपनी जान का खतरा महसूस होता है तो  उसे सुरक्षा दी जानी चाहिए। उच्च न्यायालय ने यह फैसला ( Order ) एक वर्षीय मुस्लिम लड़की की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा | 

एक हिंदू लड़के से अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ ( Muslim Girls ) शादी करने वाली 17 साल की एक मुस्लिम लड़की ने अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट में याचिका डाली थी।  कोर्ट ( Court ) ने सुनवाई के लिए याचिका को स्वीकार करते हुए उक्त आदेश दिया।


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लड़की के परिवार वालों की तरफ से नाबालिग होने की दलील को खारिज करते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम लड़की ( Muslim Girls ) के यौवन आरंभ होते ही वह अपनी मर्जी  से अपनी शादी कर सकती है और उसके अभिभावक या माता पिता को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार ( Rights ) नहीं है। हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता लड़की की Age – 17 वर्ष है और वह अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ विवाह ( Marriage ) करने के योग्य है। और जिस लड़के ( Boys ) से वह विवाह कर रही है, और उसकी उम्र करीब 33 साल है।

कोर्ट ने फिर कहा  कि मुस्लिम लड़की ( Muslim Girls ) की शादी मुस्लिम पर्सनल लॉ द्वारा संचालित होती है। और सर दिनशाह फरदुनजी मुल्ला की किताब ‘प्रिंसिपल्स ऑफ मोहम्मडन लॉ’ के अनुच्छेद 195 , ( Airticle – 195 ) में कहा गया है कि एक लड़का और एक लड़की 15 साल की आयु में यौवन अवस्था हासिल कर लेता है, और जो शादी के लिए योग्य मानी जाती है।