पार्टनरशिप डीड ( Partnership Deed )क्या है | Best Legal 2022
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पार्टनरशिप डीड ( Partnership Deed )क्या है | Best Legal 2022
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 Partnership Deed – पार्टनरशिप डीड वह भागीदारी कार्य होता है। जिसमे दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर किसी बिजनेस या फर्म में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते है। किसी भी बिजनेस हेतू की गई भागीदारी संविदात्मक होती है। जो बिना किसी दबाव के शुरू की जाती है। 

Partnership Deed – जब दो या दो से अधिक लोग साथ मिलकर एक विशिष्ठ कार्य हेतू समझौते के तहत एक नया व्यापार अथवा किसी पुराने बिजनेस  में ही साझेदारी करते हैं, तो वह एक भागीदारी पार्टनरशिप द्वारा संचालित फर्म कहलाती है। और यदि आप किसी को साझेदार या पार्टनर बनकर एक नया बिजनेस  शुरू करना चाहते है, तो उसके लिए यह आवयशक  होता है कि एक करार , अग्रीमेंट किया जाय जो कि लिखित में ही होना चाहिए | दो समझोतेदारो  के बीच होनें वाले लिखित अग्रीमेंट को पार्टनरशिप डीड कहते है | पार्टनरशिप में बिजनेस प्रारम्भ  करनें के लिए पार्टनरशिप डीड की आवश्यकता होती है, इसके लिए लीगल सलाह  लेना काफी फायदेमंद होता है 

Partnership Deed – हमारे देश में अधिक से अधिक  लोग अपना खुद का  व्यवसाय शुरू करनें के लिए दो या दो से अधिक लोगो को साझेदार  बनाते है, जिससे  व्यवसाय को शुरू आसानी से शुरू किया जा सके | दूसरे वाक्यों  में हम यह कह सकते है, कि यह बिजनेस  या फर्मपार्टनरशिप में चलायी जा रही है | किसी भी बिजनेस  को पार्टनरशिप में चलानें से पहले साझेदारी  के लिए कुछ शर्ते निर्धारित की जाती है,

जैसे कि आपनें जिसे भागीदार  बनाया है वह कम्पनी या बिजनेस  में कितनें प्रतिशत हिस्सेदार है | लाभ या हानि होनें पर वह कितनें प्रतिशत नफा / नुकसान का हिस्सेदार होगा आदि इसी प्रकार की कई  शर्ते निर्धारित की जाती है, और इन विभिन्न शर्तों को कानूनी रूप से मान्यता देने के लिए एक लिखित पत्र दस्तावेज तैयार किया जाता है, जिसे हम पार्टनरशिप डीड( Partnership Deed ) कहते है | 

पार्टनरशिप दें डीड का रजिस्ट्रेशन किस एक्ट के अन्तर्गत होता है।

Partnership Deed – भारत में साझेदारी , पार्टनरशिप भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 द्वारा प्रस्तावित व शासित होती है | पार्टनरशिप एक्ट के अकॉर्डिंग साझेदारी फर्म को रजिस्ट्रेशन करना वैकल्पिक अर्थात इच्छानुरूप  है,

अर्थात पार्टनर भागीदार ,अपनी पार्टनरशिप को पंजीकृत या रजिस्ट्रीकृत कर सकते हैं या नहीं भी कर सकते हैं। परन्तु फर्म का रजिस्ट्रेशन न होनें पर विवाद की स्थिति उत्पन्न या जन्म होनें पर अनेक प्रकार की प्रॉब्लम्स  का सामना करना पड़ता है,  और इसलिए हमेशा लिखित व प्रामाणिक पार्टनरशिप डीड तैयार करना और फर्म को रजिस्ट्रार ऑफ फर्म के साथ पंजीकृत करना सही होता है।

Partnership Deed – आप फर्म के रजिस्ट्रेशन न होनें पर फर्म किसी भी सिचुएशन  में किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं कर सकते, Exp –  के लिए यदि किसी पार्टी या शॉपकीपर नें फर्म को बकाया राशि का भुगतान नहीं किया है, तो कंपनी का रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण किसी प्रकार की  कानूनी कार्यवाही नहीं कर सकते है |

और इसके साथ ही किसी भागीदार या पार्टनर के खिलाफ मामला नहीं कर सकती है । भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के तहत , किसी फर्म के रजिस्ट्रेशन  की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है। किसी भी फर्म का रजिस्ट्रेशन  फर्म शुरू करनें या शुरू करनें के बाद भी कर सकते  है, BUT  इसके लिए एक निर्धारित शुल्क व  जुर्मानें की धन राशि का भुगतान करना होता है |


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पार्टनरशिप डीड स्टाम्प ड्यूटी क्या है।

Partnership Deed – भारतीय स्टांप एक्ट – 1899 की Section – 46 के अनुसार पार्टनरशिप डीड से सम्बंधित कार्यों के लिए स्टांप शुल्क निश्चित है, यह बात ओर है की  यह शुल्क राज्यों के अनुसार अलग-अलग हों सकते है| गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर पार्टनरशिप डीड को 200 रुपये या उससे अधिक के न्यूनतम मूल्य के साथ नोटरी से प्रमाणित किया जाता है। 

Partnership Deed – और  हम दिल्ली शहर की बात करे तो यहाँ पार्टनरशिप डीड पर कम से कम स्टाम्प शुल्क 200 रुपये है। मुंबई में यह न्यूनतम स्टांप शुल्क , देय साझेदारी पर देय मान्य शुल्क 500 रुपये है। वहीं बेंगलुरु में, स्टाम्प शुल्क के रूप में 500 रुपये का पेमेन्ट करना होगा। कोलकाता में पार्टनरशिप डीड को 500 रुपये के स्टांप पेपर पर मुद्रित किया जाता है।

भारतीय सँविधान की अनुसूचीI के अनुच्छेद – 44 के अनुसार  गुजरात स्टाम्प एक्ट – 1958 के तहत, पार्टनरशिपडीड पर स्टांप शुल्क भागीदारी राशि  का 1 प्रतिशत  है, जो अधिकतम सीमा 10,000 रुपये है।

Partnership Deed ( images 1 )

पार्टनरशिप में सम्मलित होने वाली इकाइयाँ क्या है। || What are the entities to be included in a partnership?

  • आपके साझेदारी कार्य प्रारूप में निम्नलिखित जानकारी शामिल होनी चाहिए:
  • आप किसी साझेदारी का नाम, साझेदारी की अवधि और साझेदारी फर्म का विवरण। साझेदारी लगातार  या एक विशिष्ट अवधि की लंबाई के लिए हो सकती है।
  • आपके भागीदारी , साझेदारी में कौन सी गतिविधियां शामिल हैं?
  • आपके भागीदारी फर्म या व्यवसाय में कौन से उत्पाद या सेवाएं बेची जाएंगी?
  • आप बिजनेस में नए उत्पादों या सेवाओं को कैसे जोड़ा जाएगा?
  • साझेदारी में भागीदारों के प्रकार या भूमिका क्या है। 
  • आप इस प्रकार चुनें , नकद, स्थगित योगदान, संपत्ति, और सेवा में प्रत्येक भागीदार का योगदान।
  • आप नए साझेदारों को चुनना या स्वीकार करना, व  आवश्यक नए साथी योगदान क्या है।
  • एक पार्टनरशिप में क्या होता है जब कोई भागीदार प्रारंभिक योगदान करने में विफल रहता है?
  • आपके साथ साझेदार अतिरिक्त भविष्य के लिए योगदान। ( Partnership Deed )
  • भागिदारों का अतिरिक्त योगदान कब स्वीकार किया जाएगा?
  • एक फर्म में भविष्य के योगदान साझेदार के हिस्से को कैसे प्रभावित करेंगे?
  • आप सभी भागीदारों के बीच लाभ और हानि कैसे वितरित की जाती है?
  • एक साझीदार , साझेदार शेयर से ड्रा कब ( टाइम पीरियड )ले सकते हैं?
  • आप एक साथी प्रतिशत के प्रमुख उद्देश्य के लिए भागीदारों को आवंटित लाभ व  हानि कैसे हैं?
  • फर्म में निहित प्रबंधन शक्तियों और कर्तव्यों, क्या है। 
  • कंपनी के सभी खर्चों को अधिकृत करने के लिए वित्तीय मामलों और शक्ति।
  • एक प्रोजेक्ट में सभी कार्य जैसे – बैठकें, अभिलेखों का रख-रखाव, साथी समय बंद, अनुपस्थिति, छुट्टियों, बीमार पत्तियों की पत्तियों सहित। ( Partnership Deed )
  • आप एक पॉलिसी जिसमें पार्टनर बिजनेस उपक्रम के अलावा भागीदारों को किसी और अन्य व्यावसायिक गतिविधि में भाग लेने की आज्ञा  दी जाएगी?
  • एक ब्याज नीति का संघर्ष।
  • एक सभी व्यापार संपत्तियों का स्वामित्व।
  • साझेदारो में एक साथी के हित की बिक्री या हस्तांतरण
  • एक भागीदारी से साझेदार का निकालना , साझेदारी अग्रीमेंट  में संशोधन, कैसे और कब, और क्यों व राज्य कानून का पालन करना। ( Partnership Deed ) 

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फर्म (Firm) कितने प्रकार की होती है। 

( Partnership Deed in Hindi )

* प्रोपराइटरशिप (Proprietorship Firm) एक प्रोपराइटर मालिक या स्वामी होता है ।
* पार्टनरशिप (Partnership Firm) दो या दो से अधिक लोग या मालिक होते सकते है, लेकिन अधिक से अधिक 50 व्यक्ति होंगे।
* हिंदू अनडिवाइडेड फैमली (HUF Firm) एक एकल फैमली, अर्थात् पति, पत्नी और बच्चे शामिल होते है। 
* एसोसिएशन ऑफ पार्टनर्स (AOP Firm) इसमें भी सामान्यतः दो या दो से अधिक मालिक होते है ।

पार्टनरशिप डीड कितने प्रकार की होती है।

Partnership Deed – पार्टनरशिप डीड को हम 8 भागों में बांट सकते है मुख्यतः यह पार्टनर व्यक्तियों या बिजनेस पर निर्भर करता है की आप किस साझेदारी के तहत कार्य को चुनते हो। 

1-Sole Proprietorship( सिंगल स्वामित्व )

सिंगल  स्वामित्व यह व्यवसाय का या Business का एक ऐसा प्रकार , रूप है जिसमे एक व्यक्ति या एक Single Individual पर्सन बिज़नेस का मालिक या Owner होता है। सिंगल  स्वामित्व को Individual Entrepreneurship के रूप में भी पहचाना जाना जाता है।

सिंगल  स्वामित्व में व्यवसाय और उस व्यवसाय का मालिक दोनों को एक समान माना जाता हैं। जब कभी व्यवसाय का मालिक मर जाता है तो समझो व्यवसाय भी मर जाता है।आप Owner और Business के बीच अंतर नहीं कर सकते।आमजन इस बिजनेस को अधिक इस्तेमाल किया जाता है। ( Partnership Deed in Hindi )

2. General Partnership (जनरल भागीदारी )

Partnership Deed – जनरल  Partnership या सामान्य भागीदारी एक प्रकार की व्यावसायिक प्रकृति  है जिसमें दो या दो से अधिक व्यक्ति बिजनेस  को शुरू करते है व Operate करते हैं।जनरल पार्टनरशिप बिज़नेस Indian Partnership एक्ट – 1932 द्वारा नियंत्रित किये गये हैं।आपके द्वारा पार्टनरशिप बिज़नेस में कम से कम 2 व अधिक से अधिक 20 मेम्बर हो सकते हैं। एग्रीमेंट के अनुसार Business का Profit व  Loss भागीदारों के या Partners के मध्य में Share किया जाता हैं। जनरल  Partnership के लिए, India  में Registration अनिवार्य नहीं है।

3 Limited Liability Partnership(सीमित देयता साझेदारी )

Partnership Deed – Limited Liability Partnership (एलएलपी) एक ऐसी व्यावसायिक प्रकृति  है जिसमें कुछ साझेदारी  की या सभी भागीदारों की Liability Limited ( सीमित ) होती है।कोई भी ( Partner ) किसी अन्य पार्टनर द्वारा बनाई गयी Liability या कर्ज के लिए जिम्मेदार  नहीं होता है।

इस प्रकार की Partnership अधिकतर  लोगों द्वारा पसंद की जाती है क्योंकि General Partnership के मुकाबले इसके बहुत सारे लाभ  होते हैं।इस प्रकार की व्यावसायिक इस्ट्रक्चर  में Ownership को Transferred किया जा सकता है। Limited Liability पार्टनरशिप  (LLP) में, व्यवसाय या कंपनी का एक आजाद  अस्तित्व होता है,

और इसलिए कंपनी का अस्तित्व ( प्रभुता )भागीदारों ( Partners ) में बदलाव या भागीदारों ( Partners ) की हुई मृत्यु से प्रभावित नहीं होता है।तथा  प्रकार की Partnership  या व्यावसायिक इस्ट्रक्चर  Limited Liability Partnership एक्ट – 2008 द्वारा शासित किया जाता हैRBI व  FIPB के पूर्व अप्रूवल  के साथ Foreign Ownership की भी अनुमति है

लेकिन Limited Liability Partnership एक्ट  के अनुसार, यह जरुरी  है कि Limited Liability Partnership में कम से कम एक साझेदार  ( Partner ) भारतीय होना चाहिए।Limited Liability पार्टनरशिप  में IT रिटर्न फाइल करना जरूरी होता है । Limited Liability पार्टनरशिप  के लिए Audit अनिवार्य नहीं है BUT  अगर आपका Turnover 40 लाख रूपए से अधिक है या LLP में योगदान 25 लाख रूपए से अधिक है तो ऑडिट जरुरी  होती है।

Partnership Deed ( images 2 )

4. Private Limited Company (प्राइवेट कंपनी )

यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बढ़ते हुए बिजनेस  और कंपनियों के बीच एक पॉपलर  कंपनी का प्रकार  है। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का कानूनी रूप से एक आजाद  अस्तित्व होता है व जिसका Company एक्ट – 2013 के तहत Registration किया जाता है।Private Limited Company में कम से कम 2 मेम्बर  और ज्यादा  से अधिक 200 सदस्य हो सकते हैं।

एक प्राइवेट  कंपनी में कम से कम 2 और ज्यादा  से अधिक 15 डायरेक्टर होते है।भारत के बहुत से क्षेत्रों में विदेशी Investment की आज्ञा  है।प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में 2 से 200 Shareholders ( शेयर होल्डर ) हो सकते हैं। Company के Shares को सार्वजनिक रूप से सम्मुख  नहीं किया जा सकता है।

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में, Shareholders ( शेयर होल्डर ) की Liability Limited होती है।इस Company टाईप  में कंपनी की Ownership को शेयर्स के जरिए  से Transferred किया जा सकता है।इस प्रकार की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए IT Return फाइल करना आवयशक  होता है। तथा व्यवसायिक संस्थाओं को Board Meeting करनी आवयशक  होती है।

5. Public Limited Company (पब्लिक कंपनी )

Partnership Deed in Hindi – एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी में, Shares  को सार्वजनिक प्रकार  से आम जनता के लिए प्रस्तुत किया जाता है। Public Limited कंपनी  को शेयर बाजार में List किया जा सकता है तथा  कंपनी को Unlisted ( अनलिस्ट ) भी रखा जाता है।इस प्रकार टाईप की Company में Shareholders अपने हिस्से के Shares का आजाद  रूप से व्यापार कर सकते हैं। वह Shares को Buy कर  सकते है या फिर Sell कर  सकते है।

एक पब्लिक  लिमिटेड कंपनी को Register करने के लिए कम से कम 7 मेम्बर  की आवश्यकता होती है। और इस कंपनी के प्रकार में ज्यादा  से अधिक सदस्य संख्या के लिए कोई सीमा  नहीं है।एक पब्लिक कंपनी में कम से कम 3 और ज्यादा  से अधिक 15 डायरेक्टर हो सकते हैं।पब्लिक कंपनी के लिए कंपनी का Prospectus ऐड चालू करना आवश्यक है।

6. One Person Company ( एक व्यक्ति एक कंपनी )

Partnership Deed – एक व्यक्ति एक कंपनी , Company Act, 2013 में पेश किया गया एक नया कंपनी प्रकार ( Company टाईप  ) है।इस प्रकार Company Type Single Entrepreneur या फिर अकेले व्यवसायिकों के लिए उपयोगी है जिसमें बिजनेस  के मालिक को कंपनी पर पूर्ण नियंत्रण ( एकाधिकार )प्राप्त होता है।इसमें किसी प्रकार के सदस्यों की जरुरत नहीं होती है।

एक Business Owner की मौत  के बाद Ownership को  Nominee को ट्रान्सफर किया जा सकता है।इस प्रकार की Company का Revenue 2 करोड़ रूपए से अधिक होता है या Paid Up Capital  50 लाख रूपए से अधिक होता है तोआपको इस  Company को Private Limited Company में मोडिफाई करना पड़ता है।

7. Hindu Undivided Family ( हिंदू अविभाजन परिवार )

इस प्रकार का बिजनेस  संगठन ओनली  भारत में पाया जाता है। इस प्रकार के बिजनेस  को Hindu Law द्वारा शासित व संपन्न किया जाता है। यह भारत के सबसे Old बिजनेस के  प्रकारों में से एक है।इस प्रकार का बिज़नेस हिन्दू परिवार के सदस्यों के पारिवारिक होने के नाते से  Operate किया जाता है।आप यदि गोद लिया हुआ व्यक्ति या बच्चा भी Hindu अविभाजन  Family का हिस्सा बन जाता है। ( Partnership Deed in Hindi PDF )

8. Co-Operative Society ( सहकारी समिति संस्था )

Partnership Deed in Hindi – एक Co-Operative Society में लोग समान फायदा  और उद्देश्यों के लिए एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य  करते हैं। Co-Operative Society एक्ट – 1912 के तहत सहकारी समिति का Registration जरुरी होता  है।एक सहकारी समिति संस्था बनाना बहुत आसान है व सहकारी संस्था बनाने के लिए 10 बालिग  व्यक्तियों की सहमति आवश्यक होती है।Co-Operative संस्था  के लिए Shares के जरिए से पूंजी जुटाई जाती है। Registration के बाद Society को कानूनी नाम व पहचान मिलती है।