पढ़े पुरी के जगन्नाथ ( Jagannath ) मंदिर की 1100 साल पुरानी रसोई की अदभुत विशेषताएं | Best Odisha News 2022
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पढ़े पुरी के जगन्नाथ ( Jagannath ) मंदिर की 1100 साल पुरानी रसोई की अदभुत विशेषताएं | Best Odisha News 2022
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आज पुरी में भगवान Jagannath की रथयात्रा निकल रही है। और इसलिए मंदिर की रसोई में लाखों लोगों का भोग प्रसाद बनेगा। यह दुनिया की सबसे बड़ी Kitchen है,

तथा यहाँ पर हर रोज करीब 1 लाख व्यक्तियों लोगों का खाना बनता है। और यहां भगवान Jagannath को हर दिन 6 वक्त भोग लगाया जाता है, और जिसमें 56 प्रकार के पकवान शामिल होते हैं। और भोग के बाद यह महाप्रसाद मंदिर परिसर में ही स्थापित आनंद बाजार में बिकता है।

भगवान जगन्नाथ ( Jagannath ) मंदिर की रसोई 11वीं शताब्दी में राजा इंद्रवर्मा के टाइम में शुरू हुई थी। और तब यह पुरानी रसोई मंदिर के पीछे दक्षिण दिशा में थी।

फिर जगह की कमी के कारण, वर्तमान रसोई साल 1682 से 1713 ई के बीच उस टाइम के राजा दिव्य सिंहदेव ने बनवाई थी। और तब से इसी रसोई में भोग बनाया जा रहा है।


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यहां Jagannath मन्दिर में कई परिवार पीढ़ियों से सिर्फ भोग बनाने का ही काम कर रहे हैं। और वहीं, कुछ लोग महाप्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के बर्तन अर्थात कुम्हार का कार्य भी करते हैं,

वह इसलिए की इस रसोई में बनने वाले शुद्ध व सात्विक भोग के लिए हर दिन एक नया बर्तन प्रयोग करने की परंपरा है।

क्यों है सबसे बड़ी रसोई जानते हैं…

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( images source by danik bhaskar )

पुरी जगन्नाथ जी की रसोई मंदिर की दक्षिण – पूर्व दिशा में स्थापित है। और इस रसोई के उत्तर दिशा में गंगा -यमुना नाम से 2 कुएं है। तथा उन्ही के पानी का यूज़ वर्षो से भगवान jagannath का भोग तैयार किया जाता है।

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( images source by danik bhaskar )

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जगन्नाथ ( Jagannath ) मंदिर की रसोई 11वीं शताब्दी में राजा इंद्रवर्मा के Time में  शुरू हुई थी। और उस Time पुरानी रसोई मंदिर के पीछे दक्षिण में थी।


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तथा वर्तमान समय में रसोई 1682 से 1713 ई के बीच उस Time के राजा दिव्य सिंहदेव ने बनवाई थी। तब से इसी प्रकार रसोई में खाना बनाया जा रहा है।

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( images source by danik bhaskar )

यहां पर कई परिवार पीढ़ियों से सिर्फ खाना बनाने का ही कार्य कर रहे हैं। तथा कुछ लोग महाप्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के बड़े व छोटे बर्तन बनाते हैं। क्योंकि Jagannath जी को इस रसोई में बनने वाले शुद्ध और सात्विक खाने के लिए हर दिन एक नया बर्तन प्रयोग करने की परंपरा है।

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( images source by danik bhaskar )

आपकी इनफार्मेशन के लिए बता दे कि जगन्नाथ ( Jagannath ) मंदिर एक्ट के मुताबिक, मंदिर के फोटो-या वीडियो किसी भी मीडिया या फिर सोशल मीडिया में पब्लिश नहीं कर सकते। और इसलिए कुछ फोटो ओडिशा Government की तरफ से जारी मैगजीन से ली हैं।

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( images source by danik bhaskar )

जगन्नाथ मंदिर 4 लाख वर्गफुट क्षेत्र में फैला हुआ है. इसकी ऊंचाई करीब 214 फुट है. इस गुबंद की छाया नहीं बनती है. मंदिर के पास खड़े होकर आप मंदिर का गुबंद नहीं देख पाएंगे.

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पुरी में किसी भी जगह से आप मंदिर के शीर्ष पर लगे सुदर्शन चक्र को देखेंगे तो वह आपको अपने सामने ही लगा दिखेगा. इसे नीलचक्र कहते हैं और यह अष्टधातु से निर्मित है.

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( images source by danik bhaskar )

इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा की अधूरी मूर्तियां विराजमान हैं. इन मर्तियों के अधूरे बनने और लकड़ी के बनाने के पीछे राजा इंद्रद्युम और उनकी पत्नी गुंडीचा से जुड़ी हुई लंबी कहानी है.