Sampatti Ka Adhikar | संपत्ति मालिक अपनी वसीयत से अजनबियों को संपत्ति देने का अधिकार | Best Supreme Court 2022
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Sampatti Ka Adhikar | संपत्ति मालिक अपनी वसीयत से अजनबियों को संपत्ति देने का अधिकार | Best Supreme Court 2022
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Sampatti Ka Adhikar में सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि भारतीय सविधान के अनुसार सभी नागरिको को अनुच्छेद – 300A के तहत संपत्ति का अधिकार प्रदान करता है। व आगे कहा की Property  का पूर्ण मालिक वसीयत द्वारा अजनबियों के हक में भी अपनी Property  देने का हकदार है। 

Sampatti Ka Adhikar – इस मामले में, सरोजा अम्मल ने Titel की घोषणा और कुछ संपत्तियों के संबंध में स्थायी निषेधाज्ञा के लिए एक Case दायर किया। उसका दावा मुनिसामी चेट्टियार की आखिरी Vasiyat और वसीयतनामे पर आधारित था,

जिसे उसने अपना पति ( Hasband ) होने का दावा किया था। ट्रायल कोर्ट ने Case का फैसला सुनाया और प्रथम अपीलीय Adalat ने प्रतिवादियों द्वारा दायर अपील को Dismiss  कर दिया। मद्रास High Court ने द्वितीय अपील की अनुमति दी और वाद को Dismiss कर दिया।

Sampatti Ka Adhikar -High Court ने कहा कि (i) एक पुरुष व  एक महिला का लंबे और निरंतर एक साथ रहना

(ii) समाज द्वारा लगातार कई वर्षों तक उनके साथ इसी प्रकार  का व्यवहार  , ( Sampatti Ka Adhikar ) ,

(iii) यह तथ्य कि वह एक ही छत के नीचे रह रहे हैं, व आमतौर पर यह Idea  लगाया जा सकता है कि वह  पति व  पत्नी के रूप में रह रहे हैं,

Sampatti Ka Adhikar – लेकिन इस प्रकार  के अनुमान का लाभ प्राप्त  नहीं होगा यदि पति या फिर पत्नी में से किसी ने दूसरे व्यक्ति से Marriage  की हो। चूंकि यह तथ्यों के आधार पर, वादी पक्ष का विवाह एक मारीमुथु गौंडर से हुआ था और उसके दो बच्चे ( Baby ) भी थे, इसलिए High Court  ने उसके खिलाफ कानून के पहले प्रश्न का उत्तर दिया।

और यह भी माना गया कि Vasiyat  के निष्पादन के आसपास संदिग्ध परिस्थितियां थीं और वसीयत को Kanoon  के अनुसार साबित नहीं किया जा सकता है।


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Supreme Court  की पीठ ने उल्लेख किया कि High Court  ने स्वयं कहा है कि चाहे वादी पक्ष मुनिसामी चेट्टियार की पत्नी थी या नहीं, वह घोषणा व  निषेधाज्ञा की राहत की हकदार होगी, यदि वह यह घटना साबित करने में सक्षम है कि वसीयतकर्ता द्वारा Vasiyat  को एक स्वस्थचित और देने वाली मनोकूल मनःस्थिति में निष्पादित किया गया था।

दूसरे पहलू की (संदिग्ध कंडीशन ) पर, जज पीठ  ने इस प्रकार नोट किया | On the second aspect (doubtful condition), the judge bench noted as follows 

Sampatti Ka Adhikar – जहां तक ​​Vasiyat  का संबंध है, तथ्य न ० (i) यह कि सभी बेटों को साल – 1978 के एक पंजीकृत विभाजन विलेख के अनुसार  उनके संबंधित हिस्से प्रदान किए गए थे

(ii) कि वसीयतकर्ता ने वास्तव में अपने ही पुत्रोँ  के खिलाफ Police  शिकायत दी थी

(iii) प्रतिवादी संख्या 2 व  6 को छोड़कर वसीयतकर्ता के पुत्रोँ  में से कोई भी लिखित बयान में लिए गए स्टैंड का समर्थन पक्ष करने के लिए गवाह बॉक्स में नहीं गया

(iv) कि वसीयत वर्ष 1992 की एक पंजीकृत Vasiyat  थी, जिसके बाद जिसके निष्पादन में वसीयतकर्ता ( 4 वर्ष ) तक जीवित रहा (v) और एक्ज़िबिट बी 21 Hospital  रिकॉर्ड केवल यह दर्शाता है कि वसीयतकर्ता को Vasiyat  के निष्पादन से दो Month  पहले तेज बुखार और मधुमेह था , ( Sampatti Ka Adhikar )

(vi) यह कि अपीलकर्ता ने कम से कम वसीयत ( Vasiyat ) के प्रमाणकों में से एक का परीक्षण किया जो ट्रायल Court  और प्रथम अपीलीय अदालत  के लिए इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त था कि वसीयत सही व  वैध थी और कोई अन्य संदिग्ध परिस्थितियां नहीं थीं।

पीठ ने आगे कहा कि High Court  ने सिविल प्रक्रिया संहिता की ( Section – 100 के अनुसार  एक दूसरी अपील में एक अलग ही निष्कर्ष पर आने के लिए एक ही सबूत ( Evidence ) की फिर से सराहना की।


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Sampatti Ka Adhikar – प्रतिवादी पक्ष वकील द्वारा  इंद्र सरमा बनाम वी के वी सरमा (2013) 15 SCC 755 पर भरोसा दिखाया जिसमें Court  ने कहा कि उक्त निर्णय इस Question  से निकला है कि क्या Domestic Violence Act  से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम, 2005 की Section  2 (एफ) के तहत उक्त अभिव्यक्ति के अर्थ के भीतर लिव इन रिलेशनशिप अर्थात Live in Relashanship एक घरेलू संबंध होगा।

Sampatti Ka Adhikar ( images 2 )

न्यायलय ने अपील की अनुमति देते हुए कहा 

यह आदेश  पहले प्रतिवादी पक्ष को कहीं भी नहीं ले जाएगा।  क्योंकि संपत्ति ( Property ) का पूर्ण मालिक अजनबियों के पक्ष में भी अपनी संपत्ति को वसीयत ( Vasiyat ) करने का हकदार है।

वाद मामले का विवरण

सरोजा अम्मल V / S  एम दीनदयालन | 2022  (SC) 379 | 2022 की ca 2828 | 08 – 04 – 2022

जज पैनल –  जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम

एडवोकेट – अपीलकर्ता के लिए वरिष्ठ एडवोकेट – जयंत मुथ राज, व प्रतिवादी के लिए वरिष्ठ एडवोकेट – हर्षवीर प्रताप शर्मा

Head Notes –  किसी संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व मालिक अजनबियों के पक्ष में भी अपनी संपत्ति को वसीयत करने का हकदार होता है। (पैरा 21 )

Sampatti Ka Adhikar – मद्रास H.C के फैसले के खिलाफ अपील जिसने दूसरी अपील की आज्ञा  दी और वादी द्वारा लाये  गए वाद को खारिज कर दिया। और  जिसने मुनीसामी चेट्टियार द्वारा अंतिम Vasiyat  और वसीयतनामे के आधार पर कुछ संपत्तियों के संबंध में Titels  की घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी।

Sampatti Ka Adhikar – और  जिसके बारे में उन्होंने दावा पेश किया था कि वह  उसका पति था और अनुमति दी गई की  ट्रायल Court  और प्रथम अपीलीय अदालत  इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि वसीयत सही व  वैध थी और कोई संदिग्ध कंडीशन नहीं थीं

High Court  ने दूसरी अपील में एक अलग निर्णय  पर आने के लिए उसी सबूत ( Evidence ) की फिर से सराहना की और  वसीयत की सत्यता ईमानदारी  और वैधता इस बात पर निर्भर नहीं करती थी कि वादी पक्ष कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है या फिर वसीयतकर्ता की रखैल है या फिर क्या वह वादी पक्ष के साथ अस्वीकार्य संबंध में थी। , ( Sampatti Ka Adhikar )