दूसरा विवाह , Section 494 and 495 of IPC in Hindi | Best 2022
Like and Share
दूसरा विवाह , Section 494 and 495 of IPC in Hindi | Best 2022
485 Views

Section 494 and 495 of IPC in Hindi – सुप्रीम कोर्ट ने कहा – भारतीय दंड सहिता में यह धारा – 494 / 495 में 7 साल की सजा का प्रावधान है। एक से अधिक शादी करने व पूर्व पति / पत्नी बिना कानूनी कार्यवाही किए चोरी छुपकर विवाह करने पर यह कानूनी प्रक्रिया लागू होती है। 

Section 494 and 495 of IPC in Hindi – IPC की धारा 494 और 495 0f हिंदी में – सुप्रीम कोर्ट ने कहा – भारतीय दंड संहिता में, इस धारा में 7 साल की कैद का प्रावधान है – 494/495। यह कानूनी प्रक्रिया एक से अधिक विवाह होने पर लागू होती है और पूर्व पति या पत्नी ने बिना कानूनी कार्रवाई किए गुपचुप तरीके से शादी कर ली। धारा 450ए-450ई – अविवाहित व्यक्ति से विवाह (आईपीसी)

Section 494 and 495 of IPC in Hindi – IPC की धारा 494 और 495 0f हिंदी में – सुप्रीम कोर्ट ने कहा – भारतीय दंड संहिता में, इस धारा में 7 साल की कैद का प्रावधान है – 494/495। यह कानूनी प्रक्रिया एक से अधिक विवाह होने पर लागू होती है और पूर्व पति या पत्नी ने बिना कानूनी कार्रवाई किए गुपचुप तरीके से शादी कर ली। इसका मतलब यह नहीं है कि एक अवैध या गैरकानूनी संबंध को कानून द्वारा वैध के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती है। धारा 419 के तहत आयोजित विवाह से संबंधित अन्य कानूनों के साथ किसी भी भ्रम से बचने के लिए; विवाह अधिनियम 1950

Supreme Court Justices डी वाई चंद्रचूड़ व Justices बेला त्रिवेदी जी की खंडपीठ ने गुजरात हाई कोर्ट द्वारा पारित एक आदेश देने वाली याचिका की चुनौती की अपील पर सुनवाई के समय कुछ टिप्पड़िया की , जिसमे ipc की धाराएँ 494 व 495 के अनुसार अपराधों के बारे में अपने पति द्वारा की गई शिकायत को रद्द करने के लिए पत्नी की अपीलीय आवेदन को ख़ारिज कर दिया गया था 


Read Me –

एन.डी.पी.एस. ( NDPS Act ) क्या होता है | Best Law Notes 2021


Section 494 and 495 of IPC in Hindi – According to Court , फैमली कोर्ट Act – 1984 के Section – 7 ( 1 ) के Sub ( B ) स्पस्टीकरण से फैमिली न्यायलय किसी भी व्यक्ति की वैवाहिक दाम्पत्य स्थिति का निर्धारण का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिनियम एक फैमिली अदालत को जिला न्यायलय होने का स्थान , दर्जा प्रदान करता है। और आप इसको CRPC के चैप्टर IX के अनुसार प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा सुनने योग्य है। और इस प्रकार किसी भी वाद निर्धारण के लिए एविडेन्स इकट्ठा करने में सक्षम बनाता है।