महिला दहेज प्रताड़ना ,Section 498A IPC | Best Law News 2022
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महिला दहेज प्रताड़ना ,Section 498A IPC | Best Law News 2022
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Section 498A IPC in Hindi – जो कोई , पति व उसके सम्बन्धी मिलकर स्त्री से दहेज़ की मांग करके परेशान करेगा वह 3 साल की सजा या जुर्माना या दोनों से दण्डित होगा। भारतीय दण्ड सहिता के अन्तर्गत महिलाओं के प्रति क्रूरता जागृत करता है।  

Section 498A – आईपीसी की धारा 490ए लागू होती है जहां किसी भी लड़की पर ऐसा हमला हुआ है जो बोल नहीं सकती है; लेकिन केवल तभी जब वह 15 वर्ष से कम उम्र की थी। इन मामलों में सजा अब पांच साल की तुलना में 14 साल के कारावास से शुरू होती है। उदाहरण के लिए: एक आरोपी एक ऐसा कार्य करता है जो लड़कों के बीच उनकी सहमति के बिना किए गए कुछ शारीरिक परिश्रम के कारण परेशानी का कारण बनता है (जैसा कि विरोध किया जाता है-उदाहरण के लिए-जहां बच्चों पर हमला किया जाता है)। इस मामले में, उन्हें परिस्थितियों के आधार पर उम्र से लेकर 65 साल की उम्र तक की सजा का सामना करना पड़ेगा

Section 498A Indian Law History

Section 498A IPC in Hindi – भारत देश में इस कानून के जन्म के कारण महिलाओँ के प्रति बढ़ते अपराध थे। जिसमें सबसे बड़ा अपराध दहेज मांगना व न देने पर उन स्त्रियों पर अत्याचार करना ,उत्पीड़न करना , जलाकर मार देना आदि इन घटनाओँ पर रोकथाम के लिए साल 1983 में यह कानून अस्तित्व में आया। इस कार्य में महिला संगठनों ने भी उपस्थिति दर्ज करायी और भारतीय दण्ड सहिंता में ( Section 498A ) kanoon का प्रावधाम करके समस्त भारतीय नारियों को उनका हक़ व सम्मान दिलाया जा सके। 


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इस धारा में सजा का क्या नियम है ?

Section 498 IPC in Hindi – हाई कोर्ट के सीनियर वकील आदित्य काला से बातचीत हुई जिसमें उन्होंने बताया है की ( Section 498A ) के तहत इस कानून को दो श्रेणी में बांटा गया है। 

* इस कानून के तहत पुलिस संज्ञेय अपराध मानकर और इसकी FIR दर्ज कर उसकी जांच करने के कर्तव्यनिष्ठ है। 

* दूसरा यह की इस ( Section 498A ) में कम्प्लेन दर्ज होने पर मजिस्ट्रेट अपने विवेकानुसार जमानत देने से मना करदे। 

पुलिस किन धाराओँ में केस दर्ज करती है ?

Section 498A – इंडियन पीनल कोड ने Section 498A को गम्भीर अपराध के रूप में स्थित किया है। जिसके लिए उक्त अपराध में दोषी साबित होने पर 3 वर्ष की जेल है और शादीशुदा महिला के 7 वर्ष के भीतर मृत्यु हो जाने पर व लड़की पक्ष के ऐतराज करने पर मान लिया जाता है।

की लड़की की मृत्यु संदिग्ध अवस्था में हुई है। तब पुलिस IPC के Section 498A / Section 302 / Section 304 ( B ) में रिपोर्ट लिखकर केस दर्ज करती है। और पुलिस यह सवाल लड़के पक्ष पर उठाकर दर्ज करती है की महिला की मृत्यु 7 साल के भीतर हुई जिसे अदालत यह मान लेगी की यह मृत्यु दहेज ( Dowry Case Murder ) में हुई है। इसलिये यह संगीन धाराएँ लिखी जाएगी