What is the reason for India Russia friendship | Best 2022
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What is the reason for India Russia friendship | Best 2022
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India Russia Friendship – India Russia Relations in Hindi , साल – 1957 से 1971 तक  भारत देश के लिए रूस ने सुरक्षा परिषद में 6 बार जी हाँ लगाया वीटो पावर, और हर बार अमेरिका करता रहा विरोध , इस विषय को जानने के लिए इतिहास के पन्नो पर नजर डालनी चाहिए 

Veto Power Kya Hota Hai || वीटो पॉवर क्या होता है।

India Russia Friendship मेँ वीटो पॉवर ( Veto Power ) का मह्त्वपूर्ण स्थान है। क्योकि रूस ने भारत को बचाने के लिए कई बार इसका प्रयोग किया है। इसके लिए वीटो पॉवर को सही तरीके से जानते है। 

Veto Power -सन्युक्त सुरक्षा परिषद संस्था ( UNSC ) द्वारा विकसित स्थाई देशों को शक्ति दण्ड पत्र प्रदान किया जाता है। स्‍थायी देशों में अमेरिका, व ब्र‍िटेन, व फ्रांस, व चीन, व रूस शामिल हैं. और किसी भी मुद्दे या विषय पर फैसला लेने के लिए इन पांचों देशों की रजामंदी जरूरी है. और इनमें से किसी भी एक देश के राजी ( Agree ) न होने पर फैसला नहीं लिया जा सकता है। 

अस्थाई मेम्बर्स में भारत, व ब्राजील, व अल्‍बानिया, व गैबॉन, व घाना, व आयरलैंड, व केन्‍या, व मेक्सिको, नॉर्वे और यूएई शामिल हैं. इन देशों के पास वीटो पावर नहीं है, हालांकि भारत व  जापान लम्‍बे समय से स्‍थायी मेम्‍बर बनाए जाने की अपील कर रहे हैं. 

सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संस्था क्या है।

India Russia Friendship News – संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) यूएन की एक प्रकार से शक्तिशाली संस्‍था है. और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर शांति और सुरक्षा सुनिश्‍चित करना इस संस्‍था की जिम्‍मेदारी है. इस संस्था का गठन द्वितीय वर्ल्ड वॉर ( Second World War ) के बाद हुई | 

और  हर महीने इस सुरक्षा संस्‍था की अध्‍यक्षता अल्‍फाबेटिकल ऑर्डर ( Order ) में बदलती है. और इस बार यह जिम्‍मा रूस को मिला हुआ है. और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर ( International Baccalaureate ) पर सुरक्षा को सुनिश्‍च‍ित करने लिए UNSC संस्‍था कुछ प्रतिबंध ( Ban ) लगाने के साथ बल का प्रयोग भी कर सकती है.

Russia’s veto power in India’s favor

 India Russia Friendship Reason – यूक्रेन ( Ukarine ) पर हमले के लिए रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लाए गए निंदा प्रस्ताव पर मतदान से भारत दूर रहा। और इसकी कुछ हलकों में आलोचना भी हो रही है, BUT  अतीत को खंगालने पर स्पष्ट हो जाता है कि भारत ( India ) का यह कदम बहुत सोचा-समझा व  सराहनीय है। और दरअसल  पूर्व के सोवियत संघ (USSR) और मौजूदा रूस ( Russia ) ने यूएनएससी में हमेशा भारतीय हितों का ख्याल रखा है। 

और जरूरत के वक्त वीटो पॉवर ( Veto Power ) का इस्तेमाल करने से भी कभी पीछे नहीं रहा। रूस का भारत ( India and Russia ) के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहने का सिलसिला 1957 से चला आ रहा है। ( India Russia Friendship ) , और तब से लेकर अब तक एक दो नहीं बल्कि कुल छह मौके ( 6 बार ) आए जब रूस ने भारत के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को अपने विटो पावर ( Veto Power ) से रोक दिया। आइए जानते हैं, कब-कब यूएनएससी ( UNSC ) में भारत पर आई थी आफत और सुरक्षा कवच की भूमिका निभाता रहा रूस ( Russia ) 


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​20 फरवरी 1957 – कश्मीर मामले पर बचाव

India Russia Friendship News – भारत ने साल – 1947 में आजादी ( Freedam ) हासिल की तो कश्मीर का रियासत ने भारत-पाकिस्तान से इतर स्वतंत्र ( Free ) रहने का फैसला किया। इसके  कुछ ही दिनों में पाकिस्तान ( Pakistan ) ने कबायलियों को भेजकर हमला बोल दिया तो कश्मीरी नेताओं ( Kashmir Ministers ) ने भारत से मदद मांगी। और भारत ने अधिग्रहण दस्तावेज पर दस्तखत करने की शर्त पर कश्मीर ( Kashmir ) की मदद की लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री ( PM )  जवाहरलाल नेहरू मामले को संयुक्त राष्ट्र लेकर चले गए। 

India Russia Friendship – और भारत को नेहरू की इस गलती की सजा भुगतनी पड़ी। और ऐसा ही मौका आया साल – 1957 में जब 20 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया, व क्यूबा, व यूके और अमेरिका ने एक प्रस्ताव लाया जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष से आग्रह ( Request ) किया गया था कि वो भारत और पाकिस्तान से बात करके इस मामले  को सुलझाएं। और इसके लिए दोनों देशों को विवादित क्षेत्र से अपनी-अपनी सेनाओं ( Army ) को वापस बुलाने को राजी करने का सुझाव दिया गया था।

और एक प्रस्ताव यह भी था कि संयुक्त राष्ट्र ( UNSC ) को कश्मीर में अस्थायी तौर पर अपना फोर्स तैनात करना चाहिए। और तब तत्कालीन सोवियत संघ ने प्रस्ताव के खिलाफ अपने वीटो पावर ( Veto Power ) का इस्तेमाल किया। और जबकि स्वीडन ने वोटिंग से दूरी बना ली थी। और तब यूएनएससी के अध्यक्ष भी स्वीडन के ही थे। ऑस्ट्रेलिया, व चीन, व कोलंबिया, व क्यूबा, व फ्रांस, व इराक, व फिलिपींस, व यूके और अमेरिका ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया था। ,  ( India Russia Friendship ) 

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(प्रतीकात्मक तस्वीर)

​18 दिसंबर, साल 1961 – गोवा, दमन और दीव पर हाय तौबा

जब फ्रांस, व तुर्की,व  यूके और अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ संयुक्त प्रस्ताव लाया जिसमें गोवा और दमन एवं दीव में भारत ( India ) द्वारा सैन्य बलों के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई गई थी। और प्रस्ताव में भारत सरकार ( Indian Government ) से फौज हटाकर 17 दिसंबर साल – 1961 से पहले की स्थिति बहाल करने की मांग की गई थी। और India Russia Friendship के चलते रूस ने यहाँ वीटो पॉवर का प्रयोग किया था। 

और प्रस्ताव में वोट 7-4 से गिर गया। और सोवियत संघ, व सिलोन (तब का श्रीलंका), व लाइबेरिया और यूएई ने प्रस्ताव के विरोध में भारत ( India ) का साथ दिया था। और वहीं, चीली, व चीन, व इक्वाडोर, व फ्रांस, व तुर्की, यूके और अमेरिका ने भारत का विरोध करते हुए प्रस्ताव का समर्थन किया था। और बहस पर चर्चा के समय  यूएन में सोवियत एंबेसडर वेलेरियन जोरिन  ने कहा, ‘पुर्तगाल का बचाव करने वाले संयुक्त राष्ट्र ( UNSC ) का हित नहीं बल्कि यह उपनिवेशवाद का पक्ष ले रहे हैं और जो 20वीं सदी का सबसे शर्मनाक फलसफा है। और वो देश दर्जनों बार विपरीत दिशा कदम उठा चुके हैं। , ( India Russia Friendship ) 

​22 जून, साल  – 1962 – फिर उठा कश्मीर का मामला  

India Russia Relation – अमेरिका ( America ) के समर्थन से आयरलैंड ने सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया था और जिसमें भारत और पाकिस्तान ( Pakistan ) की सरकारों से कश्मीर विवाद को सुलझाने की मांग की गई थी। और इसमें कहा गया कि दोनों सरकारें ( Government ) ऐसा माहौल बनाएं ताकि बातचीत के जरिए समझौते ( Agreement ) तक पहुंचा जा सके।

यूएसएसआर ने फिर से प्रस्ताव के खिलाफ वीटो पावर ( Veto Power ) लगा दिया। रोमानिया ने भी प्रस्ताव के विरोध में वोट  करके भारत का साथ दिया जबकि घाना व  यूएई ने वोटिंग से दूरी बना ली। वहीं, चीली, व चीन, व फ्रांस, व आयरलैंड, व यूके, व अमेरिका और वेनेजुएला ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

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साल 1971 में अटल जी एक जनसभा को सम्बोधित करते व रूस से मिले समर्थन का स्वागत करते हुए ( Images by 99 kanoon )

​4 दिसंबर, साल -1971 – पाकिस्तान बॉर्डर पर युद्धविराम की गुहार

अमेरिका ( America ) के नेतृत्व में प्रस्ताव लाकर भारत-पाकिस्तान ( Pakistan ) सीमा पर युद्धविराम लागू करने की मांग की गई और जिसके खिलाफ रूस ने वीटो पावर ( Veto Power ) का इस्तेमाल किया। अर्जेंटिना, व बेल्जियम, व बुरुंडी, व चीन, व इटली, व जापान, व निकारागुआ, व सियरा लियोन, व सोमालिया, व सीरिया और अमेरिका ने प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया। , ( India Russia Friendship ) 

और तब तत्कालीन जनसंघ (बाद की बीजेपी) के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ने रूस ( Russia ) के वीटो का स्वागत किया था। दिल्ली ( Delhi ) के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में वाजपेयी ने कहा था, ‘और मौजूदा संकट में जो साथ देगा, वह हमारा दोस्त ( Friend ) है। विचारधारा की लड़ाई ( War ) बाद में लड़ ली जाएगी।’ और ध्यान रहे जनसंघ वामपंथ का विरोधी था और जिसका अगुवा तत्कालीन सोवियत संघ और अब का रूस है। 

​5 दिसंबर, साल 1971 – शरणार्थियों का मामला 

India Russia Friendship – अर्जेंटिना, व बेल्जियम, व बुरुंडी, व इटली, व जापान, व निकारागुआ, व सियरा लियोन और सोमालिया ने भारत-पाकिस्तान सीमा  पर युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव लाया ताकि शरणार्थियों की किसी प्रकार वापसी हो सके। सोवियत संघ ने पांचवीं बार वीटो पावर ( Veto Power ) के इस्तेमाल से भारत का साथ दिया। और वहीं अमेरिका ने फिर भारत ( India ) का विरोध करते हुए प्रस्तावक देशों का साथ दिया। और वहीं, पोलैंड ने प्रस्ताव के विरोध में मतदान  किया। और बड़ी बात यह हुई कि इस बार कार्यक्रम में यूके वोटिंग से दूर रहा और फ्रांस भी। 

​14 दिसंबर, साल 1971 – सैन्य वापसी की मांग करना 

India Russia Friendship – अमेरिका प्रायोजित प्रस्ताव में भारत और पाकिस्तान की सरकारों ( Government ) से युद्धविराम और अपनी सेनाओं को अपने-अपने इलाकों में वापस बुलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की मांग की गई। और यूएसएसआर ( Russia ) ने फिर से प्रस्ताव को फिर से वीटो कर दिया। और पोलैंड ने भी प्रस्ताव के विरोध में वोट डाला और जबकि फ्रांस व  यूके फिर वोटिंग में भाग नहीं लिया। और अर्जेंटिना, व बेल्जियम, व बुरुंडी, व चीन, इटली, व जापान, व निकारागुआ, व सिरया लियोन, व सोमालिया, सीरिया और अमेरिका ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया था। 


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अमेरिका ने तब भी भारत विरोधी नीति अपनाई 

इस प्रकार  सुरक्षा परिषद में भारत ( India ) के खिलाफ लाए गए छह प्रस्तावों में जिनके खिलाफ रूस ( Russia ) ने वीटो पावर का इस्तेमाल किया, और अमेरिका ने उन सबका समर्थन किया। इस दौरान कुछ ताकतवर ( Powerful ) देशों ने तटस्थता भी बरती, लेकिन अमेरिका हर मौके पर भारत ( India ) का विरोध करता रहा।

1971 में भारत ( India ) के खिलाफ दो बार प्रस्ताव लाए गए तब भी फ्रांस और यूके ने वोटिंग में भाग नहीं लेकर अपनी तटस्थता की स्थिति अपना ली, लेकिन अमेरिका तब भी India  का विरोध करता रहा। और उससे पहले यूके और फ्रांस भी India  के विरोध में वोटिंग करते रहे थे।