Transit Bail क्या होती है। क्या है इसके लाभ Best 2021
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Transit Bail क्या होती है। क्या है इसके लाभ Best 2021
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Transit Bail क्या है – ट्रांजिट बेल अदालत द्वारा दी गई जमानत है। जिसका उस स्थान पर अधिकार क्षेत्र नहीं है , जहां अपराध किया गया था। Transit Bail कहलाती है।

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supreme court Indian kanoon ( images )

Transit Anticipatory Bail ( ट्रांजिट ऐंटीसीपांतरी बेल क्या है )

यह बेल कब दी जाती है।  जब कोई व्यक्ति , उस राज्य के अलावा , जिस राज्य में वह वर्तमान में रहता है। , किसी अन्य राज्य की पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी की आंशका व्यक्त करता है।  जैसा कि शब्द ” ट्रांजिट “, बताता है , यह एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने व ले आने का काम करता है।

supreme court kanoon ( images )


उदहरण के लिय 👉 A , पंजाब का निवासी है  और इस बात की आंशका है कि दिल्ली मे ( A ) के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है , एक सामान्य स्थिति में , A को बेल पाने के लिए , पँजाब से दिल्ली की यात्रा करनी होगी , क्योकि दिल्ली कोर्ट को , A को जमानत देने का अधिकार है।  परन्तु  A दिल्ली मे गिरफ़्तारी से बचने के लिए पंजाब की अदालत मे ( anticipatory bail ) ले कर दिल्ली कोर्ट मे सुरक्षित पेश हो सकता है।  ट्रांजिट बेल एक समय अवधि के लिए दी जाती है।


👦 Transit bail under crpc

Transit Bail अ 0 प्र 0 स 0 – धारा – 438 ” गिरफ़्तारी की आंशका व्यक्ति करने वाले व्यक्ति को बेल देने के निर्देशों से सम्बन्धित है।


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👨 Transit Remand in Hindi

ट्रांजिट रिमांड क्या होता है।  –  अगर आरोपी की गिरफ़्तारी शहर से बाहर हुई हो , जिस शहर मे उसके खिलाफ केस दर्ज है।  , तो आरोपी को ट्रांजिट रिमांड के जरिए ही लाया जाता है।

इसके तहत जाँच एजेंसिया स्थानीय अदालत मे आरोपी को पेश करती है।  और अदालत को बताती है।  कि आरोपी के खिलाफ अमुख शहर मे केस दर्ज है।  लिहाजा उसे सम्बन्धित अदालत मे पेश करना है।  , इसलिय आरोपी को ले जाने वाले , लगने वाले वक्त के हिसाब से ट्रांजिट रिमांड दिया जाए।

Transit Remand ( photos )

जितने दिनों के लिए ट्रांजिट रिमांड दी जाती है।  . उतने वक्त मे आरोपी को सम्बन्धित अदालत मे पेश करना होता है।  इस दौरान अगर आरोपी चाहे तो जमानत की अर्जी दाखिल कर सकता है।  और अदालत से गुहार लगा सकता है।  कि सम्बन्धित अदालत मे खुद पेश हो जाएगा।  लिहाजा उसे ट्रांजिट रिमांड दिया जाए।  और अदालत चाहे तो उसे ट्रांजिट रिमांड भी दे सकती है।

टूलकिट केस – निकिता जैकब और शांतनु मुलुक की गिरफ़्तारी पर रोक

निकिता जैकब और शांतनु मुलुक पर शोशल मीडिया द्वारा कृषि कानूनों से सम्बंधित अफवाह , दंगा भड़काने आदि से सम्बंधित मामले के लिए दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर गिरफ़्तारी की थी मुलुक ने बॉम्बे हाई कोर्ट में Transit Bail Application द्वारा आवेदन दिया है। ( 10 Days की ) मार्ग में गिरफ़्तारी नहीं होने की राहत प्राप्त की है।

निकिता जैकब को आवेदन कोर्ट में देने पर एक हफ़्ते की सुनवाई के बाद राहत प्रदान की गई है।

सन 1985 के एक Order के अनुसार बॉम्बे हाईकोर्ट की एक (बैंच )खंडपीठ ने एनके नायर व अन्य V/ S महाराष्ट्र राज्य (1985) में कहा गया। अदालत के पास आपराधिक प्रक्रिया संहिता की ( धारा – 438) के अनुसार Transit Bail – एक आवेदन पर विचार करने का अधिकार प्राप्त होगा। वह आवेदक उसके क्षेत्र अधिकार के अन्दर गिरफ्तारी की आशंका व्यक्त कर रहा है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने निकिता जैकब की Transit Bail – Order में कहा – “स्वतंत्रता की रक्षा और तत्काल गिरफ्तारी से बचाव के लिए अनिश्चित रूप से राहत प्रदान प्राप्त हो सकती है।

एंटीसिपेटरी बेल आवेदनों में सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां अपने क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र तक सीमित हैं। जावेद आनंद (सुप्रा) के मामले में कहा गया है। ऐसे मामले हो सकते हैं। जहां सुरक्षा प्रदान नहीं की जाती है। लेकिन अन्य किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी।

धारा – 438 के अनुसार आवेदन करने का प्रमुख कारण व्यक्ति की गिरफ्तारी की आशंका व्यक्त करना है। वर्तमान मामले में- गिरफ्तारी की प्रबल आशंका है “(निकिता जैकब बनाम महाराष्ट्र राज्य)।


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